उपराष्ट्रपति के भाषण के प्रमुख अंश
गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार द्वारा आयोजित वेद विज्ञान एवं संस्कृति महाकुंभ का उद्घाटन
माँ भारती के इस भू भाग देवभूमि उत्तराखंड में आना परम सौभाग्य है. इस विश्वविद्यालयका वर्षों से नाम सुनता रहा हूं, आज पहली बार आने का मौका मिला है. नाम से ऊर्जावान होता रहा हूं, आज यहां से एक बड़ा संकल्प लेकर जाऊंगा|
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार हमारी संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत, इसके संरक्षण इसके सृजन का प्रमुख केंद्र है, मुख्य आधार है. भारत की पहचान दुनिया में और हमारे मन में 5000 साल की संस्कृति की वजह से है and this place is the epicenter, nerve centre to culture our civilizational ethos and essence.
हमारे दर्शन का निचोड़, हमारे दर्शन का तात्पर्य है, हमारे दर्शन का महत्व इसका यह प्रमुख केंद्र है|
महर्षि दयानंद सरस्वती की 220 जयंती एक बहुत बड़ा महत्वपूर्ण मौका है| इसका मिश्रण एक दूसरे महत्वपूर्ण मौके से हो गया, स्वामी श्रद्धानंद के 75 में बलिदान दिवस और इसका तीसरा महत्व हो गया की इमरान दो का संगम जब हुआ इस विश्वविद्यालय ने तीन दिवसीय वेद विज्ञान एवं संस्कृति महाकुंभ का आयोजन किया है.
भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद के प्रणेता इन मनीषियों की पावन स्मृति में आयोजित यह महाकुंभ, उनके महान जीवन के प्रति हमारी विनम्र श्रद्धांजलि है। उन्होंने हमारी संस्कृति पर एक छाप अमिट छोड़ी है जो हमें हमेशा प्रेरणा देती रहेगी|
इस महाकुंभ के माध्यम से वेद विज्ञान को सशक्त करने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है| मैंने राज्यसभा के सभापति की हैसियत से केंद्रीय मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान जी को अनुरोध किया कि समय आ गया है कि हम वेदों में झांके पर थोड़ी चिंता होती है कि बहोतों ने तो वेद देखा ही नहीं है| मेरा आग्रह रहेगा कि हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को वेद से अवगत कराये| यह हमारे राष्ट्रीय निर्माण के लिए और विश्व के स्थतित्व के लिए बहुत महत्वपूर्ण है|
हमारी नई शिक्षा नीति हमारे सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप है, हमारी सांस्कृतिक विरासत का सृजन करने वाली है| हर भारतवासी को अपनी संस्कृति और विरासत को लेकर गौरव अनुभव करना चाहिए और हम करते हैं भारतीयता हमारी पहचान है| जहां भी देश में जाएंगे हमारी पहचान भारतीयता है, राष्ट्रवाद हमारा परम धर्म है| हमें गर्व होना चाहिए कि हम एक महान राष्ट्र के नागरिक है| हाल के वर्षों में अर्जित अप्रत्याशित सफलता, अकल्पनीय विकास से हमारा सर ऊंचा होना चाहिए और पर इस पर कभी कोई कमी नहीं आनी चाहिए.
यह चिंता और चिंतन का विषय है, कुछ गिने चुने लोग गौरव तो छोड़ दीजिए अपनी संस्कृति, गौरव मे अतीत और वर्तमान विकास को लेकर अपमान का भाव रखते हैं. इनकी संख्या बहुत कम है| भारत की महान छवि को धूमिल करने में यह लोग लगे रहते हैं|
वो या तो भ्रमित है या पथभ्रष्ट है| भारत विरोधी प्रचार और देश की संस्कृति को धूमिल करने का हर कुप्रयास को कुंठित करना हर भारतीय का परम दायित्व है और कर्तव्य है|
इन ताकतों को जो हमारी संस्कृति के विरोध में है राष्ट्रवाद के विरोध में है हमारे अस्तित्व के विरोध में है उन पर प्रतिघात होना चाहिए. भारतीय ज्ञान परंपरा और वैदिक ज्ञान विज्ञान का एकेडमिक विमर्श और अनुप्रयोग का अनिवार्य अंग बनाने के उद्देश्य से तीन दिवस से जो आपकी गोष्टी है वह एक सार्थक प्रयास है.
हर माप दंड पर आज का कार्यक्रम समविक महत्व रखता है. इसकी गूंज देश के हर विश्वविद्यालय में जाएगी. यहां का संदेश प्रेरणादायक होगा. इसके लिए मैं विश्वविद्यालय के कुलपति और गुरु जनों को साधुवाद का पत्र मानता हूं.
वेद विज्ञान महाकुंभ का यह पर्व हमें हमारी प्राचीन ज्ञान और विज्ञान के प्रति गर्भ महसूस करने का एक आदित्य अवसर प्रदान करता है| अक्सर देखा जाता है कि हम भूल जाते हैं कि हम कौन हैं थोड़ा अंदर झांकेंगे तो पता लगेगा कि विश्व में हमारा मुकाबला करने वाला और कोई देश नहीं है|
अनेक कदम सरकार ने उठाया जो हमारी संस्कृति और वेदों के अनुरूप उठाए गए हैं| भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से नागरिको द्वारा अपने कर्तव्य पालन के पंच प्राण आह्वान किया था| आने वाले 25 साल के लिए देश को पंच प्राण पर अपनी शक्ति अपने संकल्पों और अपने सामर्थकों को केंद्रित करने पर ज़ोर दिया था| आप इसकी सार्थक शुरुआत करेंगे|
पंच प्राण क्या है? विकसित भारत, पहला प्राण| हमारी यात्रा निरंतर बढ़ती जा रही है हमें दिख रहा है कि भारत निश्चित रूप से विकसित भारत होगा| दसवे नंबर की अर्थव्यवस्था आज दुनिया में पांचवा नंबर पर आ गई है| दशक के अंत तक तीसरे नंबर पर आ जाएगी यूके को पीछे छोड़ दिया फ्रांस जर्मनी जापान कनाडा यह सब पीछे रह जाएंगे इस दशक के अंत में|
दूसरा गुलामी की हर सोच से मुक्ति कुछ लोग अभी भी अंग्रेजीयत के गुलाम है हमारी संस्कृति में विश्वास नहीं रखते हैं हमारे सोच का अनादर करते हैं संस्कृति हमें डेवलप करनी होगी|
विरासत पर गर्व करना तीसरा प्राण एकता और एक जुटता चौथ पुराण नागरिकों के कर्तव्य पांचवा प्राण|
मै निश्चित मानकर चलता हूं कि यह बात याद दिलाने के लिए मैं भारत माँ की पूरी भूमि में से सबसे सुयोग्य जगह से यह बात कह रहा हूं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के पंच प्रणों में से यह भी एक प्रण है : गुलामी के हर चिन्ह से मुक्ति!
आपने देखा होगा इंडिया गेट के ऊपर नेताजी सुभाष बोस का स्टेचू कितना बड़ा कदम है, राजपथ को कर्तव्य पथ करना कितना बड़ा विचार है|
वर्ल्ड बैंक जो पहले चिंता करते थे कि हमारे अर्थव्यवस्था जर्जर है, आज कहते हैं कि भारतवर्ष वह देश है जो सबसे ज्यादा आर्थिक प्रगति कर रहा है| विश्व के लिए इन्वेस्टमेंट और अपॉर्चुनिटी का फेवरेट डेस्टिनेशन है|
यह उपलब्धि हमारी वर्तमान स्थिति की है सफलतापूर्वक आयोजित G20 सम्मेलन में भारत की समृद्ध संस्कृति और वेद-विज्ञान की झलक दी है|
मैंने खुद आंखों से देखा है कि दुनिया के नेता अभीभूत हो गए जानकारी प्राप्त करते रहे देश के साठ शहरों में 200 से ज्यादा बैठक होकर विदेशी नेताओं को भारत की संस्कृति का ज्ञान हुआ| अचंभित है वह!
उन्होंने जो प्रशंसा की, मेरा सर ऊंचा हो गया कि मैं इस महान भारत इस भारत माँ की सेवा में लगा हुआ हूं और मुझे इसका एक सपूत बनना चाहिए|
G20 का मोटो क्या था ‘One Earth, One Family, One Future’. पूरी दुनिया ने इसको ग्रहण कर लिया है यही हमारी सृष्टि को बताने का यही मात्र माध्यम है|
आगे देखिए प्रधानमंत्री जी ने सम्मेलन में जो हिस्सा लेने शासन अध्यक्ष आए उनका स्वागत किया और जब हम स्वागत को देख रहे थे, क्या स्थान चुना उसके पीछे कोणार्क की ऐतिहासिक सूर्य मंदिर के चक्र की प्रतिकृति लगी हुई थी हर फोटो में कोणार्क सूर्य मंदिर दिखाई दिया है| दुनिया ने देखा है| इसी दौरान यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल बिहार का प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय बैकग्राउंड में देखा है, नटराज की मूर्ति दुनिया ने देखी है|
जहां आयोजन हो रहा था भारत मंडपम वहा संस्कृत गालियारे थे पाणिनि का व्याकरण ग्रंथ अष्टाध्यी रिग वेद की पांडुलिपियों, सूर्य द्वारा नमक मूर्ति कला और मध्य प्रदेश की भीमबेटक की गुफा चित्र की डिजिटल तस्वीरें प्रदर्शित हो रही थी.
हर विदेशी मेहमान आँख लगाकर भारत की संस्कृतिक विरासत का आनंद ले रहा था, भारत का सम्मान कर रहा था यह अत्यंत अद्भुत गौरवान्वित करने वाला पल था और मुझे भारत माँ का एक पुत्र होने के नाते कृषक पुत्र के इस पद पर आने की वजह से पल-पल देखने का मौका मिला.
मैंने आमंत्रित किया है यहां के छात्र-छात्राओं को नए संसद भवन के लिए उसमें आप भारतीयता और हमारे सदियों पुरानी संस्कृति की भरपूर झलक देखेंगे.
लोकसभा की थीम क्या है सोचिए? लोकसभा की थीम है राष्ट्रीय पक्षी मोर आप जब उसे कक्ष को देखेंगे तो आप अभीभूत हो जावोगे|
राज्यसभा की थीम है हमारा राष्ट्रीय फूल कमल और प्रांगण में बरगद भी है, यह बदलाव थम नहीं रहा है यह बदलाव निरंतरता से आगे जा रहा है|
हाल सत्र में इसी माह तीन नए विधि विधान पारित किए गए बड़े महत्वपूर्ण बिल है भारतीय न्याय संहिता विधेयक 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक 2023 और भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023 लोकसभा में पारित हुए, राज्य सभा मे पारित हो गए और वह कानून बन गए|
पर मिला क्या? अंग्रेजों ने जो हमें जकड रखा था कानून की वजह से, उसी कानून में हमारे लोग पिस रहे थे. उनका उद्देश्य था दंड विधान भारत की संसद में प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से दंड विधान को न्याय विधान किया है यह बहुत ही महत्वपूर्ण है|
योग दिवस विश्व हमारी देन है भारत के प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र संघ में आह्वान किया, दुनिया को बताया आपको जान को पहचानता होगी कि 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र के 177 सदस्य द्वारा 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली| अब भारत के योग का योगदान दुनिया के हर भू-भाग को मिल रहा है, हर व्यक्ति को मिल रहा है. यह उनके स्वास्थ्य में सुधार कर रहा है और इस प्रस्ताव को अप्रत्याशित रूप से सफलता मिली और 90 दिन में इसको पारित किया जो एक नया इतिहास रचित हुआ|
गुरुकुल कांगड़ी जैसे शिक्षा संस्थान ज्यादा नहीं है आप अद्भुत हैं आप एक प्रेरणा के स्रोत हैं राष्ट्रवादी चेतना और चिंतन के केंद्र है|
कुछ पश्चिमी विश्वविद्यालय अनर्गल कारणों से हमारी संस्कृति हमारी विकास यात्रा को कलंकित करने में लगे हुए हैं मेरे मन में कोई शंका नहीं है, आपके संकल्प को देखते हुए भारत की संस्कृति कभी नीचे नहीं होगी आपको उनका प्रतिकार करना चाहिए|
इस महान देश में कुछ लोग हैं, गिने चुने लोग हैं वह भारत की प्रगति को पचा नहीं पा रहे हैं, आप उनकी पाचन शक्ति को ठीक कीजिए, वह हमारे ही है भटके हुए हैं, हमारा कर्तव्य है उन्हें मातृ भाषा में समावेशी शिक्षा प्रणाली स्वीकार ही नहीं है यह कैसी बात है? अब वह दिन दूर नहीं है जब हर शिक्षा मातृभाषा में दी जाएगी|
आर्य समाज ने सदैव नारी सशक्तिकरण को विशेष बल दिया है, अनेक शहरों में आर्य कन्या विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं भारत के प्रधानमंत्री ने जो तीन दशक तक नहीं हो पाया उसको अंजाम दिया और नारी सशक्तिकरण विधेयक को पास किया अब हमारे लोकसभा में, विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण महिलाओं का है यह बहुत बड़ी उपलब्धि है.
2047 तक भारत न सिर्फ विकसित भारत होगा बल्कि विश्व गुरु की अपनी प्रतिष्ठा को फिर से हासिल करेगा मेरे सामने जो छात्र-छात्रायें हैं, विद्यार्थीगण है वह 2047 के भारत के योद्धा है और निश्चित रूप से सफलता अर्जित करेंगे|




