
रिपोर्ट :- शिवा वर्मा (सम्पादक)
फिरोजाबाद। थाना उत्तर पुलिस टीम द्वारा चैंकिग संदिग्ध व्यक्ति- वाहन के दौरान मुखबिर की सूचना पर थाना उत्तर पर पंजीकृत मुकदमा संख्या 433/2024 धारा 306/317(2)/61 बी0एन0एस0 से सम्बन्धित चोरी की घटना का सफल अनावरण करते हुए 04 अभियुक्त:-
1 . सचिन पुत्र छोटेलाल
2 . अर्नब पुत्र धर्मनारायण
3 . राजकुमार पुत्र सोहनस्वरुप 4. सूजल पुत्र महेश
दिनांक 08.07.2024 को रहना क्षेत्र मे पड़ने वाले खाली ग्राउंड के पास एक प्लाट से समय करीब 00.09 बजे गिरफ्तार किया गया है। अभियुक्तों के कब्जे से एक पीली धातु डिजाइनदार एक अंगूठी जनानी डिजाइनदार पीली धातु, दो झुमके डिजाइनदार पीली धातु, एक अंगूठी छतरी वाली पीली धातु डुप्लीकेट, दो झुमकी पीली धातु डुप्लीकेट, दो अंगूठी पीली धातु डुप्लीकेट, 4 खाली डिब्बा नेकलेस, 3 खाली चेन के डिब्बे, 5 अंगूठी के खाली डिब्बे, एक आई फोन आसमानी रंग व नगदी 15,000 रुपये बरामद किए गये हैं। उपरोक्त अभियुक्तगण सुक्खा गैंग के नाम से गैंग चलाते हैं। अभियुक्तों के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही कर सभी को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।

पूछताछ का विवरण-:
अर्नव ने पूछताछ में बताया कि मैने अपने मौसा के घर का सारा जेवरात सचिन भैया, शिवा भैया, रोहित भैया, प्रांजल भैया को कहने पर पैसो के लालच में चोरी किया था और इनको दे दिया था। ये लोग लगातार मुझे नशा कराते रहे और मुझसे घर से चोरियां कराते रहे। इन लोगो ने मुझे कुछ जेवरात शुरुआत में बेचकर कुछ पैसे दिये थे जिनको इन्होंने ही मुझसे नशे में खर्च करवा दिया। कुछ दिन पहले मेरे मौसा को मुझ पर शक हो गया था तो मैं डर से घर से भाग गया था तब मैने सचिन भैया, शिवा भैया, रोहित भैया, प्रांजल भैया, राजकुमार व सूजल को सारी बात बतायी कि घर पर पता चल गया है तो इन लोगो ने मुझे नकली जेवरात जो हूबहू चुराये हुये जेवरातो से मिलते है, बनवाकर आज लाकर दिये है जिससे मैं अपने घर जाकर वापस दे दूं और किसी का नाम न लूं। हम सभी लोग रोज शाम को अलग अलग जगह बैठकर दारू पीते है तथा ये सभी लोग सुक्खा गैंग के नाम से गैंग चलाते है जिसमें मुझे भी शामिल कर लिया है।
अन्य अभियुक्तगणो से घटना व बरामदगी के संबंध में कड़ाई से पूछताछ की गयी तो सभी ने एक स्वर मे बताया कि हम लोगों प्रांजल, शिवा और रोहित जो जैन नगर के ही रहने वाले है, ने एक साथ मिलकर प्लान बनाया था क्योंकि हम लोगों पर कोई रोजगार नहीं है। अर्नव सूजल का दोस्त था जो हमारे पास बैठता उठता था। एक दिन यह अपने घर से एटीएम लेकर आया जिसमे इसी का नंबर पड़ा हुआ था जो इसी की बहन का एटीएम था उसका पिनकोड इसको पता था और पैसे निकालने का मैसेज भी इसी के फोन पर आता था। उस एटीएम से हम लोग रोजाना पैसे निकालकर खर्च करते रहे। तब एटीएम खाली होने पर अर्नव हमसे पैसे मांगने लगा तब हमने यह प्लान बनाया कि तू अपने घर से सोना चोरी कर ले उसे बेचकर तेरे एकाउंट में पैसे डाल देंगे। कुछ पैसे हमने डाले भी है लेकिन उसको दोबारा से अर्नव ने पैसे निकालकर खर्च कर दिये। फिर हमने दोबारा जेवरात चोरी की योजना बनाई और जेवरात बेचकर अपने शौक मौज में पैसे खर्च कर दिये है। जो पैसे हमसे बरामद हुए है वह पैसे उन्ही जेवरातों को बेचकर बचे पैसों में से है।




