
रिपोर्ट मंडल प्रतिनिधि समित अवस्थी
जनपद बाराबंकी अखिल विश्व गायत्री परिवार के विशेष प्रतिनिधि एंव देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार के प्रति कुलपति डॉ0 चिन्मय पण्डया जी मुख्य पण्डाल मंच पर उपस्थ्ति होकर अपने ओजस्वी उद्बोधन में मौजूद जन सैलाब को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज सम्पूर्ण मानवता पीड़ा पतन, वैश्विक महामारी से प्रभावित है। ऐसी विषम परिस्थितियों में गायत्री और यज्ञ से अमृत का सिंचन करना होगा। यह कार्य गुरूसत्ता ने आप सबको सौंपा है वातावरण के परिशोधन के लिए गायत्री और यज्ञ को घर-घर पहुँचाना होगा। जिस इन्सान के अन्दर इन्सानियत, मानवता, दया, त्याग, करूणा, बलिदान, संवेदना, क्षमा, धैर्य की क्षमता विकसित हो जाये वही सच्चा देवता है। वही साक्षात् स्वर्ग है।
श्री पण्डया जी ने कहा कि आज इन्सान के पास सभी भौतिक सुख साधान मौजूद है लेकिन इन्सान दिल की दृष्टि से गरीब हो गया है। इन्सान भावनाओं की दृष्टि से गरीब और दरिद्र बन गया है। यज्ञ हमें बाँटना सिखाता है। सम्पूर्ण संसार में सूर्य, बादल, धरती, नदी, सभी यज्ञ कर रहें है। हमारे जीवन में जो चल रहा है वो भी यज्ञ है। पूज्य गुरूदेव ने कहा है कि अपनी रोटी मिल बाँट कर खाओ ताकि तुम्हारे सभी भाई सुखी रह सके जो दूसरे का दुख बाँटने का कार्य करता है वही सच्चा इन्सान है। व्यक्ति को साझेदारी करने का भाव जागृत करना होगा। साझेदारी का भाव यज्ञ से ले जायें। सम्पूर्ण विश्व ही यज्ञशाला है।
उन्होने कहा कि समाज को अच्छा करने के लिए व्यक्ति के दिल का ताला खोलने की जरूरत है। यज्ञ का सही मर्म, सही उद्देश्य पूरे राष्ट्र को पहुँचा सके यही सच्चा यज्ञ है। आज इस विशाल यज्ञ में मन की नकारात्मा, घर के संकट, नास्तिकता, अचिन्त चिन्तन, बुराईयाँ, दोष दुर्गण यहीं छोड़कर जायें। यहाँ से खुशियाँ, संस्कार, जीवन जीने का सही उद्देश्य लेकर जाये तभी मानव में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने बताया कि बाराबंकी के लगभग 100 छात्र देव संस्कृति विश्वविद्यालय में अध्यन कर चुके है। जो एक गर्व का विषय है। उद्बोधन से पूर्व देव मंच पर गुरूसत्ता के चित्रों पर माल्यार्पण व पूजन का क्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर गायत्री परिवार बाराबंकी की ओर से श्री पण्डया जी का अक्षत, पुष्प मालाओं से जोरदार स्वागत के साथ स्मृति चिन्ह व अंगवस्त्र भेंट किया गया। मंच पर विष्णु कुमार शर्मा ’कुमार‘ द्वारा रचित पुस्तक समर्पण का विमोचन भी किया गया। तत्पश्चात् डॉ0 चिन्मय पण्डया जी गायत्री शक्ति पीठ अयोध्या के लिए अपने काफिले के साथ रवाना हो गये।
प्रातः काल से ही 108 कुण्डीय यज्ञशाला में देवपूजन, नवग्रह, गौरीगणेश, लक्ष्मी सरस्वती, दुर्गाकाली समेत समस्त देव शक्तियों का आह्वान वैदिक स्वर विलम्बित गति में संगीतमय लहरी में शान्तिकुंज टोली द्वारा किया गया। तत्पश्चात् पूर्णाहुति एवं आरती का क्रम सम्पन्न हुआ। सांयकाल मुख्य पंडाल मंच पर शान्तिकुंज से पधारी केन्द्रीय टोली द्वारा संगीत प्रवचन का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में अपर जिला जज अजय श्रीवास्तव ने देव मंच पर माल्यार्पण पूजन अर्चन किया। पंडाल मंच पर शान्तिकुँज के टोली नायक पं0 सुनील शर्मा (गायक) संजय सिंह, तबला वादक रूद्र गिरि गोस्वामी, (कैशियोवादक) भूषण चौधरी द्वारा प्रस्तुत गीत हे हंस वाहिनी माँ, हे श्रृष्टि की विधाता, गुरू चरणों में आकर देखो सब क्लेश कलह मिट जाते है, हे प्रभु जीवन हमारा यज्ञमय कर दीजिए, काफी सराहा गया। यज्ञ शाला मण्डप में प्रत्येक कुण्ड पर सपत्नीक दम्पत्तियों ने जोड़े के साथ देवपूजन सम्पन्न किया।
इस अवसर पर शान्तिकुंज से पधारे टोली नायक पं0 सुनील शर्मा ने युग ऋषि के विचारों को सुनाते हुए कहा कि गुरू और शिष्य का रिश्ता जन्म जन्मान्तर का होता है। गुरू और शिष्य का सम्बन्ध शाश्वत है विचार जीवन का हेड मास्टर। विचार ही शरीर को संचालित करता है। विचारों में पूरी दुनिया को बदलने का सामर्थ्य है।
ज्ञान दो प्रकार के होते है। पहला भौतिक ज्ञान, दूसरा अध्यात्मिक ज्ञान। आज किसी को किसी पर विश्वास नहीं है। अनास्था संकट का दौर चल रहा है। लोग नास्तिक होते जा रहे है। इन्सानियत शर्मसार होती जा रही है। ऐसी भयावह परिस्थितियाँ उत्पन्न हो गयी है। गरूवर ने ज्ञान गंगा के रूप में गायत्री और यज्ञ को सर्वसुलभ कर दिया है। घर परिवारों में सुसंस्कारिता का वातावरण पैदा करने के लिए बच्चों में प्रणाम की आदत डाले। संस्कार परम्परा को पुर्नजीवित करें भारतीय संस्कृति की रक्षा हेतु आस्थावान, निष्ठावान, मिशन के परिजन आगे आयें। 07 मई शनिवार को प्रातः 06 बजे से 10 बजे तक भव्य यज्ञशाला में विभिन्न संस्कार व हवन कई पालियों में सम्पन्न होगा। साहित्य स्टाल पर युग ऋषि द्वारा रचित पुस्तकों एवं व्यसन मुक्त प्रदर्शिनी के अवलोकन का दिन भर तांता लगा रहा।




