
रिपोर्ट :- उज्जवल कुमार
राजमहल। (साहिबगंज)मॉडल कॉलेज राजमहल में दिनांक 08 जनवरी 2026 को महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ रणजीत कुमार सिंह का जन्मदिवस अत्यंत हर्षोल्लास एवं पर्यावरणीय चेतना के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से सहभागिता निभाते हुए “हरित पृथ्वी – हरित परिसर” के प्रेरक नारे के साथ वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जन्मदिवस का उत्सव मनाना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी को सुदृढ़ करना रहा। महाविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपित किए गए।जिससे परिसर को और अधिक हरा भरा एवं स्वच्छ बनाया जा सके।
इस अवसर पर डॉ रमजान अली ने प्राचार्य डॉ रणजीत कुमार सिंह को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की। उन्होंने कहा कि प्राचार्य महोदय का जीवन विद्यार्थियों एवं समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षक श्री प्रबीर सिंह ने प्राचार्य महोदय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “ राजमहल ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के साथ-साथ स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण की जो लौ डॉ रणजीत ने जली है, उसे निरंतर प्रज्वलित रखा है। उनका प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।”
वहीं डॉ अमित कुमार ने भी प्राचार्य महोदय के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि “डॉ रणजीत कुमार सिंह ने सदैव पर्यावरण संरक्षण को अपनी प्राथमिकता में रखा है और महाविद्यालय को हरित परिसर के रूप में विकसित करने की दिशा में निरंतर कार्य किया है।”
छात्रों ने जन्मदिन पर पेड़ देकर अनुकरणीय उदाहरण देते हुए सम्मानित किया |
कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डॉ रणजीत कुमार सिंह ने उपस्थित सभी शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि
“कोई भी आयोजन हो, पेड़ जरूर लगाए व पृथ्वी माँ की रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। यदि हम पर्यावरण को सुरक्षित रखेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियाँ सुरक्षित रहेंगी।”
कार्यक्रम प्रकृति व मानवता संरक्षण के संकल्प और सभी ने पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया। उपस्थिति कविंद्र पासवान,मोहन सिंह, सुमित साह , करमु महतो, बबलू हेम्ब्रम, उषा, सौरभ कुमार साह , पीयू मंडल, सुमन सिंह,नरेश कुमार, छात्र राहुल, कुंदन, आर्यन, खुशी, मीठी आदि रहे।



