मौसम में हुए बदलाव ने एक बार फिर किसानों की मुश्किलों को बढ़ाया

सिद्धार्थनगर- विजय पाल चतुर्वेदी

मौसम में हुए बदलाव ने एक बार फिर किसानों की मुश्किलों को बढ़ा दिया। पिछले दिनों से तेज हवाओं के साथ हो रही लगातार बरसात के बाद किसान के माथे पर धान की तैयार फसल बर्बाद होने की चिता सताने लगी है। बुधवार को भी पूरे दिन काले बादलों के बरसात होती रही रही और देर शाम तेज बरसात हुई।सितंबर के अंतिम सप्ताह में अपेक्षा से अधिक बरसात किसानों की कमर तोड़ रही है। खरीफ सत्र की सबसे महत्वपूर्ण फसल धान को हो रहे नुकसान से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिरने की आशंका है। तेज हवाओं से जहां खेतों में खड़ी फसलें गिर रही हैं । वहीं पानी भरने से धान की बालियां सड़ने के कगार पर है। फसल को बचाना किसानों के लिए चुनौती बना है
रबी में भी मौसम ने दिया था दगा – बीती फरवरी में रबी की मुख्य फसल गेंहू व अन्य फसलों के पकने की अवधि में शीतकालीन वर्षा से किसानों को भारी नुकसान हुआ। वहीं इस साल धान की रोपाई के समय से ही अपेक्षित वर्षा होने से किसान मुदित रहे। फसल बेहतर होने से अच्छे उत्पादन की उम्मीद बनी। बारिश का कहर किसान की बची उम्मीद पर पानी फेर रहा है




