बाराबंकी
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संगीत नाटक अकादमी लखनऊ एवं संस्था विजय बेला एक कदम खुशियों की ओर लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित।

संगीत नाटक अकादमी लखनऊ एवं संस्था विजय बेला एक कदम खुशियों की ओर लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित।
रिपोर्ट:- नीरज शर्मा
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लखनऊ एवं संस्था विजय बेला एक कदम खुशियों की ओर लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 15 दिवसीय नाट्य कार्यशाला का शानदार समापन हुआ। इस अवसर पर लखनऊ पब्लिक स्कूल बाराबंकी शाखा के प्रेक्षागृह में महेंद्र भीष्म द्वारा लिखित ऐतिहासिक नाटक वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का अत्यंत प्रभावशाली मंचन किया गया, जिसने दर्शकों में राष्ट्रभक्ति और आत्मसम्मान का अनूठा जज्बा भर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व पुलिस अधिकारी डॉ० सत्या सिंह, डॉ० आदर्श गर्ग व नाटक के लेखक महेंद्र भीष्म, प्रदीप सारंग एवं आदर्श गुलसिया द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस विशेष कार्यशाला का प्रशिक्षण और नाटक का कुशल निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी चंद्रभाष सिंह ने किया।

नाटक में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की महान वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के जीवन, संघर्ष और बलिदान को सशक्त रंगमंचीय प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत किया गया। मंच से जैसे ही रानी लक्ष्मीबाई का प्रसिद्ध उद्घोष *मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी* गूंजा, पूरा सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। प्रस्तुति में बालिका मणिकर्णिका के साहसी व स्वाभिमानी व्यक्तित्व से लेकर झाँसी की महारानी बनने तथा अंग्रेजी शासन की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध उनके ऐतिहासिक संघर्ष को बखूबी दिखाया गया।
ओजपूर्ण संवादों, युद्ध दृश्यों और कलाकारों के जीवंत अभिनय ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। नाटक में रानी लक्ष्मीबाई के साथ-साथ तात्या टोपे, नाना साहेब एवं अन्य क्रांतिकारियों के संघर्ष को भी प्रभावी रूप से मंचित किया गया। अंतिम दृश्य में जब रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान का चित्रण किया गया, तो दर्शकों की आंखें नम हो गईं। यह नाटक नारी सशक्तिकरण का एक मजबूत संदेश देने में सफल रहा।
नाटक में मलक बुशरा, प्राख्या श्रीवास्तव, श्रेया श्रीवास्तव, अंशिका रस्तोगी, शुभांगी वर्मा, स्मिता तिवारी, प्राची रस्तोगी, राशि रस्तोगी, श्रद्धा कुमारी, देवेंद्र कुमार, शौर्य मिश्रा, जयगणेश कुमार त्रिवेदी, आदर्श गुलसिया, रजत वर्मा, प्रदीप सारंग, यश श्रीवास्तव, मो. अजीज, युग शर्मा, पार्थ पटेल, विनोद कुमार चौधरी, अयांश गुप्ता, अहेम श्रीवास्तव, अनुनय जैन, साद अहमद एवं अभिनव प्रताप सिंह ने विभिन्न भूमिकाओं में सराहनीय अभिनय कर वाहवाही लूटी।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित नाट्य प्रेमियों ने पूरी टीम को बधाई देते हुए प्रस्तुति को प्रेरणादायी और ऐतिहासिक चेतना से ओतप्रोत बताया। इस 15 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के सफल आयोजन में बहार सुगम संगीत प्रभाग बाराबंकी, कमला नारायण ट्रस्ट एवं आँखें फाउंडेशन का विशेष सहयोग रहा।




