
रिपोर्टर :- उज्जवल कुमार साहा
साहिबगंज। गंगा दियारा क्षेत्र के किसानों के लिए कृषि विशेषज्ञों ने एक महत्वपूर्ण संदेश जारी करते हुए कहा है कि संतुलित पोषण ही मजबूत और अधिक उत्पादन देने वाली फसल की कुंजी है। सही मात्रा में एन-पी-के (नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम) के उपयोग से फसलों का तना मजबूत होता है, जड़ें गहरी होती हैं और पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसान यदि वैज्ञानिक तरीके से खेती करें तो कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं। इसके लिए नियमित मिट्टी जांच कराना बेहद जरूरी है, जिससे खेत की उर्वरता के अनुसार सही उर्वरक का चयन किया जा सके।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे संतुलित उर्वरकों का उपयोग करें और एन-पी-के का सही अनुपात बनाए रखें। खासकर पोटाश के उपयोग से फसल की मजबूती बढ़ती है और पौधे रोगों व प्रतिकूल मौसम का बेहतर सामना कर पाते हैं।
कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि “मजबूत फसल ही समृद्ध किसान की पहचान है।” इसलिए आधुनिक तकनीक और संतुलित पोषण अपनाकर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। लिए कृषि विशेषज्ञों ने एक महत्वपूर्ण संदेश जारी करते हुए कहा है कि संतुलित पोषण ही मजबूत और अधिक उत्पादन देने वाली फसल की कुंजी है। सही मात्रा में एन-पी-के (नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम) के उपयोग से फसलों का तना मजबूत होता है, जड़ें गहरी होती हैं और पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसान यदि वैज्ञानिक तरीके से खेती करें तो कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं। इसके लिए नियमित मिट्टी जांच कराना बेहद जरूरी है, जिससे खेत की उर्वरता के अनुसार सही उर्वरक का चयन किया जा सके।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे संतुलित उर्वरकों का उपयोग करें और एन-पी-के का सही अनुपात बनाए रखें। खासकर पोटाश के उपयोग से फसल की मजबूती बढ़ती है और पौधे रोगों व प्रतिकूल मौसम का बेहतर सामना कर पाते हैं।
कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि “मजबूत फसल ही समृद्ध किसान की पहचान है।” इसलिए आधुनिक तकनीक और संतुलित पोषण अपनाकर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।



