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भारतरक्षा मंत्रालय

भारतीय सेना ने संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के 76वें अंतर्राष्ट्रीय दिवस का स्मरणोत्सव मनाया

रिपोर्ट:-शमीम 

भारतीय सेना ने आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) शांति सैनिकों के 76वें अंतर्राष्ट्रीय दिवस का स्मरणोत्सव मनाया। इस अवसर पर उप सेना प्रमुख (सूचना प्रणाली एवं समन्वय) लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर, संयुक्त राष्ट्र संगठन के अधिकारियों और रक्षा मंत्रालय तथा विदेश मंत्रालय के कर्मचारियों ने पुष्पांजलि अर्पित की। आज का ही वह दिन है, जब वर्ष 1948 में संयुक्त राष्ट्र के पहले शांति मिशन के अंतर्गत “संयुक्त राष्ट्र युद्धविराम पर्यवेक्षण संगठन (यूएनटीएसओ)” ने फिलिस्तीन में सामरिक गतिविधियों को शुरू किया था।

हर वर्ष आज के दिन संयुक्त राष्ट्र और दुनिया भर के तमाम देश उन पुरुष एवं महिला सैनिकों की कार्य कुशलता, समर्पण व साहस को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान में अपनी सेवाएं दी हैं और अभी भी सेवा कर रहे हैं। यह दिन उन लोगों के बलिदान की स्मृति में भी मनाया जाता है, जिन्होंने शांति के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है।

भारत ने हमेशा से संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के अभियानों में योगदान दिया है और इसकी समृद्ध विरासत है। भारत अपने सैनिकों का सबसे बड़ा योगदान देने वाले देशों में से एक है। भारत ने अब तक विभिन्न शांति अभियानों में लगभग 2,87,000 सैनिकों की सेवाएं उपलब्ध कराई हैं। भारतीय सेना के जवानों ने कठिन समय, चुनौतीपूर्ण इलाकों और विपरीत परिचालन स्थितियों में काम किया है। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र के आदेशों का सम्मान रखने के लिए सर्वोच्च बलिदान देने तक अनुकरणीय साहस और वीरता का प्रदर्शन किया है। यह उल्लेखनीय तथ्य है कि भारतीय सेना के 160 जवानों ने दुनिया भर में शांति सुनिश्चित करने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। वर्तमान समय में, भारतीय सशस्त्र बल नौ देशों के शांति मिशनों में तैनात हैं, जिनके नाम हैं – यूएनडीओएफ, यूएनआईएफआईएल, यूएनटीएसओ, यूएनएफआईसीवाईपी, एमओएनयूएससीओ, यूएनएमआईएसएस, यूएनआईएफएसए, एमआईएनयूएससीए और एमआईएनयूआरएसओ।

भारत संयुक्त राष्ट्र, मेजबान देशों और साझेदार देशों के लिए क्षमता विकसित करने में सबसे आगे रहा है। भारत ने हमेशा चुस्त एवं लचीली इकाइयां, शांति रक्षक प्रशिक्षण, रसद सहायता, लैंगिक समानता के विस्तार और तकनीकी संवर्द्धन में योगदान देकर संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों में सहयोग करने का प्रयास किया है। भारत ने प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचा विकास और नागरिक सैन्य समन्वय (सीआईएमआईसी) गतिविधियां प्रदान करके भी मेजबान देश की क्षमता विकास के लिए सक्रिय रूप से सहायता उपलब्ध कराई है। इसके अलावा, भारतीय सेना की पशु चिकित्सा टुकड़ियों ने भी संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मिशनों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। सूडान में पशु चिकित्सा टुकड़ी के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल गुरप्रीत सिंह बाली द्वारा अबेई में पशुओं के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार लाने के प्रयासों की संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय द्वारा सराहना की गई।

भारतीय सेना ने शांति अभियानों में विशेष प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र (सीयूएनपीके) की स्थापना भी की है। यह केंद्र हर वर्ष 12,000 से अधिक सैनिकों को प्रशिक्षित करता है। संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र संभावित शांति सैनिकों और प्रशिक्षकों के लिए आकस्मिक प्रशिक्षण से लेकर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रमों तक की कई गतिविधियां संचालित करता है। यह सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को साझा करने के एक हिस्से के रूप में विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी भी करता है। संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र प्रशिक्षण के क्षेत्र में क्षमता निर्माण के एक भाग के हिस्से के तहत नियमित रूप से मित्र देशों में सचल प्रशिक्षण दल भेजता है। यह संस्थान पिछले दो दशकों में उत्कृष्टता के केंद्र और अनुभव तथा सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों के भंडार के रूप में विकसित हुआ है।

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भारतीय सेना ने संयुक्त राष्ट्र के मिशनों में भारतीय टुकड़ियों की जंगी कार्रवाई दक्षता एवं स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक उपकरण और वाहन तैनात किए हैं। ये वाहन एवं उपकरण भारत में निर्मित हैं और मिशन वाले क्षेत्रों में कठिन भूभाग, मौसम तथा परिचालन स्थितियों की अनिश्चितताओं का सफलतापूर्वक सामना कर चुके हैं।

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संयुक्त राष्ट्र ने मिशनों में स्थानीय महिला आबादी की चिंताओं को बेहतर ढंग से दूर करने के लिए अपने लैंगिक समानता अभियान के हिस्से के रूप में महिला शांति सैनिकों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से अनिवार्य लक्ष्य निर्धारित किए हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र की इस महत्वपूर्ण पहल के पूर्ण सहयोग व नारी शक्ति पहल के साथ तालमेल बिठाते हुए डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और अबेई (लाइबेरिया के बाद दूसरी सबसे बड़ी भारतीय महिला टुकड़ी) में महिला सहभागिता दल (एफईटी) तैनात किए हैं। भारत ने गोलान हाइट्स में महिला सैन्य पुलिस और विभिन्न मिशनों में महिला स्टाफ ऑफिसर/सैन्य पर्यवेक्षकों को भी तैनात किया है। कई अन्य प्रमुख योजनाओं के अनुसार अन्य मिशनों के लिए भारत की तरफ से सैन्य योगदान भी बढ़ाया गया है। इसी क्रम में मेजर राधिका सेन को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय द्वारा “मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर 2023” पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए चुना गया है, जो संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना पहल में भारतीय महिलाओं के सकारात्मक योगदान का प्रमाण है।

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भारत ने 05-06 दिसंबर, 2023 को घाना के अकरा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल होकर संयुक्त राष्ट्र द्वारा भविष्य की शांति स्थापना गतिविधियों के प्रति अपनी वचनबद्धता की पुनः पुष्टि की है। इस बैठक के दौरान, भारत ने संयुक्त राष्ट्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से अगले दो वर्षों के लिए पैदल सेना की एक टुकड़ी, विभिन्न उप-समूहों, प्रशिक्षकों हेतु संयुक्त राष्ट्र पूर्व-तैनाती प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक पाठ्यक्रम की प्रतिबद्धता जताई है।

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