आज के युग में जो पैसों के आगे स्वार्थपरता से ठुकरा दिये जाते हैं।
ऐसे लोगों की आह का मार्मिक चित्रण भी कवि करता है।

मैं हैरान हूँ कि एक अव्यावसायिक, अप्रशिक्षित चित्रकार प्रकृति का इतना सुन्दर चित्रण कर सकता है।
रिपोर्ट :- शिवा वर्मा।
बाराबंकी। आज के युग में जो पैसों के आगे स्वार्थपरता से ठुकरा दिये जाते हैं, ऐसे लोगों की आह का मार्मिक चित्रण भी कवि करता है। यथार्थ और कल्याण के मिश्रण की उनकी कविता एक बानगी है।
यह बात मुख्य अतिथि ललित कला अकादमी के अध्यक्ष सीताराम कश्यप ने पुस्तक विमोचन व कला प्रदर्शनी-सम्मान समारोह में कही। साहित्यकार समिति एवं यूनिक सोशल वेलफेयर सोसायटी के संयुक्त तत्वाधान में डिस्ट्रिक्ट को-आपरेटिव बैंक के चन्द्रमौलि सभागार में विश्वम्भर नाथ अवस्थी ‘पप्पू भैया’ के बनाए चित्रों की प्रदर्शनी तथा दीपक सिंह के काव्य संग्रह ‘तुम्हारे लिए-2’ का विमोचन व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि सीताराम कश्यप अध्यक्ष ललिति कला अकादमी, सुप्रसिद्ध कवि डॉ. सुभाष राय, समाजसेवी पंकज गुप्ता ‘पंकी’, अध्यक्षता कर रहे शिक्षाविद् डॉ. सुजीत चतुर्वेदी ने गणपति पूजन के बाद फीता काटकर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसके उपरांत कवि दीपक सिंह के काव्य संग्रह ‘तुम्हारे लिए-2’ का विमोचन किया।

मुख्य अतिथि श्री कश्यप ने दीपक सिंह के काव्य संग्रह ‘तुम्हारे लिए- भाग-2’ के बारे में कहा कि उनकी कविताओं में गंगाराम जैसे गाँव के सरल चरित्र हैं। चित्रकार पप्पू अवस्थी के चित्रों के बाबत कहा, मैं हैरान हूँ कि एक अव्यावसायिक, अप्रशिक्षित चित्रकार प्रकृति का इतना सुन्दर चित्रण कर सकता है। चित्रकार विनोद सिंह के चित्रों में रंगों के संयोजन की भूरि भूरि प्रशंसा की। मूर्तिकार कृत वर्मा और अमर पाल को जनपद का ही नहीं बल्कि प्रदेश का बड़ा मूर्तिकार बताया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. सुभाष राय ने कहा कि यह समय कवि और कविता के लिए चुनौती पूर्ण हैं। ऐसे कठिन समय में कवि दीपक सिंह ने अपनी कविता से गरीबों की रोटी, घर के लिए उनके मार्मिक संघर्षों का दस्तावेजीकरण किया है। किन्तु इन सब के बावजूद वे जीवन में प्रेम और सौन्दर्य के वर्णन का अवसर ढूँढ लेते हैं। श्री राय ने कला प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि आश्चर्य में पड़ गया हूँ कि बाराबंकी में इतने बड़े नामचीन मूर्तिकार और चित्रकार भी हैं।
डॉ. श्याम सुन्दर दीक्षित ने कवि दीपक सिंह को बधाई देते हुए कहा कि उनकी गजलों में इश्क मजाजी और हकीकी दोनों के रूप हैं। उनकी कविताओं में जीवन का सहज दर्शन है जो गंभीर विमर्श को रचता है। चित्रकार पप्पू अवस्थी के चित्रों की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे सहज जीवन के प्रकृति के अद्भुत चितेरे चित्रकार हैं। उनके चित्रों में प्रकृति का जीवन्त रूप धड़कता है। जैसे चित्र अभी-अभी बोल पड़ेगे।
साहित्यकार समिति के अध्यक्ष डॉ. विनय दास ने काव्य संग्रह के लिए कवि को बधाई दी उन्हें समसामयिक ज्वलंत विषयों का बेहद संवेदनशील कवि बताया। चित्रकार पप्पू अवस्थी के चित्रों में प्रकृति के विराट रूप के चित्रण में भारतीय और इंग्लिश दोनों रंगों के सजीव और सुन्दर सहमेल के प्रयोग के लिए बधाई दी। उन्होनंे कहा कि विनोद सिंह की चित्रकला किसी भी बड़े चित्रकार के समकक्ष खड़ी दिखी। मूर्तिकार कृत वर्मा और अमरपाल की मूर्तियों को जीवन्तता की जितनी प्रशेंसा की जाय कम है।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने अवधी लोक गायिका पूजा पाण्डेय को तीजन बाई स्मृति सम्मान, मूर्तिकार अमरपाल को सतीश गुजराल स्मृति सम्मान, विश्वम्भरनाथ अवस्थी पप्पू भैया को चित्रकार जगदीश स्वामीनाथन सम्मान, कवि दीपक सिंह को डॉ. धर्मवीर भारती स्मृति सम्मान के अन्तर्गत नकद धनराशि, अंगवस्त्र माला प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष की भाँति दिये गये हैं।

कार्यक्रम को विशिष्ट अतिथि पंकज गुप्ता पंकी, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ0 सुजीत चतुर्वेदी, शायर इकबाल राही आदि ने सम्बोधित किया। इस मौके पर पर्यावरण प्रहरी डीके शुक्ल और उनकी ठीम ने अतिथियों को फूलदार पौधे भी भेंट किए। इस मौके पर जनपद के वरिष्ठ साहित्यकार अजय सिंह गुरु जी, अवधी सम्राट डा. रामबहादुर मिश्र, शिवकुमार व्यास, राम किशोर तिवारी ‘किशोर’, डा. अम्बरीश अम्बर, यूनिक सोशल वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष पंकज कंवल, डा. बलराम वर्मा, अजय प्रधान, ओपी वर्मा ओम, कार्यक्रम व्यवस्थापक अनुपम कुमार वर्मा, आशीष राज, सीताकान्त मिश्र, दिपाशु पाठक, चन्दन पटेल, रजनी श्रीवास्तव, रत्नेश कुमार, नरेन्द्र मिश्र, विपिन वर्मा, प्राचार्य घनश्याम मौर्य, एडवोकट पार्थ चतुर्वेदी, संजय भैय्या, डॉ. दिवाकर श्रीवास्तव आदि भारी संख्या में मौजूद थे।




