निज भाषा उन्नति है, सब उन्नति मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।

रिपोर्ट :- शिवा वर्मा (संपादक)
बाराबंकी। निज भाषा उन्नति है, सब उन्नति मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल। उक्त पक्तियां मुख्य अतिथि साहित्यकार समिति के अध्यक्ष डा. विनय दास ने टी.आर.सी. लाॅ काॅलेज में हिन्दी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में कहीं। संगोष्ठी का शुभारम्भ मुख्य वक्ता, मुख्य अतिथि तथा कालेज के प्राचार्य ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
सांस्कृतिक समन्वयक, प्रवक्ता दीपमाला श्रीवास्तव के संचालन में कार्यक्रम को कालेज के प्राचार्य डा. अश्वनी गुप्ता ने सम्बोधित करते हुए कहा कि देश मैकाले की शिक्षा पद्धति से उबर नहीं पा रहा है, हमें हिन्दी को राजभाषा दर्जा दिलाने के लिए लम्बा संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रयासों से मेडिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी अब हिन्दी माध्यम से की जा सकती हैं। कार्यक्रम में बी.ए. एलएल.बी. की छात्रा जाह्नवी यादव ने हिन्दी के उद्भव तथा विकासक्रम पर व्याख्यान दिया।

मुख्य अतिथि डा. विनय दास ने हिन्दी की महत्ता को समझाते हुए बताया कि 14 सितम्बर, 1956 से हिन्दी दिवस मनाया जाता है। सर्वप्रथम 1918 में महात्मा गांधी ने हिन्दी सम्मेलन में हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए आवाज उठाई।
संगोष्ठी में अपने विचार रखते हुए मुख्य वक्ता डा. इकबाल राही ने कहा कि हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए, देश को हमारी जरूरत चाहें जैसे और जिस रूप में हों। जिस राष्ट्र की भाषा गुलाम हो वह राष्ट्र कभी स्वतंत्र नहीं हो सकता। हमें इससे आजाद होने का संकल्प लेकर हिन्दी को वरियता देनी होगी।
कार्यक्रम के अन्त में प्राचार्य ने मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता को स्मृति चिन्ह के रूप में औषधीय पौधा गुड़मार देकर सम्मानित किया। वहीं मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता ने अपनी स्वरचित पुस्तकें विद्यालय के पुस्तकालय को भेंट कीं। इस अवसर पर प्रवक्ता वीर विक्रम सिंह, मो. अमजद अंसारी, शशिकान्त दीक्षित सहित छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।




