
रिपोर्टर :- उज्जवल कुमार साहा
कोलकाता। रेलवे की पटरियां जहां एक ओर लाखों यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं, वहीं अब ये बेजुबान जीवों के लिए सुरक्षा की मजबूत ढाल भी बनती जा रही हैं। पूर्व रेलवे के रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक सशक्त अभियान चलाकर यह साबित कर दिया है कि रेल नेटवर्क अब अपराधियों के लिए आसान रास्ता नहीं रहा।
पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के नेतृत्व और प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त अमिय नंदन सिन्हा के निर्देशन में चलाए जा रहे “ऑपरेशन वाइलेप” के तहत आरपीएफ ने बीते दो वर्षों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। यह अभियान न सिर्फ वन्यजीवों की तस्करी पर अंकुश लगा रहा है, बल्कि देश की जैव विविधता को बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में आरपीएफ ने 14 मामलों का खुलासा करते हुए 3 तस्करों को गिरफ्तार किया। इस दौरान 188 कछुए, 130 बुलबुल, 6 बाज के बच्चे, 5 इगुआना और 4 फाल्कन को सुरक्षित बचाया गया। वहीं वर्ष 2025-26 में कार्रवाई और तेज हुई, जिसमें 20 मामलों का पर्दाफाश कर 26 तस्करों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान 1,646 कछुए, 600 तोते, 48 कबूतर, 20 पहाड़ी तोते, 6 खरगोश, 6 राजहंस, 3 सांप और मोर पंखों के 40 बंडल बरामद किए गए।
बचाए गए सभी वन्यजीवों को तुरंत वन विभाग को सौंपा गया, जहां उनके पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया।

आरपीएफ द्वारा ट्रेनों में एस्कॉर्टिंग, स्टेशनों पर हाई-टेक निगरानी और खुफिया तंत्र के सहयोग से इस अवैध नेटवर्क पर लगातार नकेल कसी जा रही है। रेलवे अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई कर तस्करों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि रेलवे सिर्फ यात्रियों को जोड़ने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा का भी दायित्व निभा रहा है। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत रेलवे प्रशासन को दें, क्योंकि एक छोटी सी सूचना भी किसी बेजुबान की जिंदगी बचा सकती है।
यह पहल एक स्पष्ट संदेश देती है कि प्रकृति की रक्षा केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति का कर्तव्य है। पूर्व रेलवे का यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम साबित हो रहा है।



