केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने महात्मा गांधी नरेगा के लाभार्थियों, नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों, क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं और राज्यों, जिलों, ब्लॉकों और ग्राम पंचायतों के अधिकारियों के साथ चर्चा की

इस वर्ष 201 करोड़ से अधिक व्यक्ति दिवस सृजित किए गए हैं, जिससे पाँच करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को रोजगार मिला है : श्री चौहान
श्री चौहान ने राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (एनएमएमएस), जियो-टैगिंग, जीआईएस-आधारित मैपिंग अनुमानों की ऑनलाइन तैयारी के लिए सिक्योर सॉफ्टवेयर और आधार-आधारित भुगतान प्रणाली जैसे तकनीकी हस्तक्षेपों की सराहना की
बजट इस बार 86 हजार करोड़ रूपये का है लेकिन अब वह भी खत्म होने वाला है : श्री शिवराज सिंह चौहान
केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज कृषि भवन, नई दिल्ली में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (महात्मा गांधी नरेगा) पर विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया गया। श्री चौहान ने महात्मा गांधी नरेगा के लाभार्थियों, नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों, क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं और राज्यों, जिलों, ब्लॉकों और ग्राम पंचायतों के अधिकारियों के साथ चर्चा की। चर्चा का फोकस योजना के कार्यान्वयन के दौरान चुनौतियों और आने वाले वर्षों में योजना की प्रभावशीलता में सुधार के सुझावों पर था। इस कार्यक्रम में ग्रामीण विकास मंत्रालय के प्रमुख हितधारकों में राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान और डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी, सचिव (ग्रामीण विकास) श्री शैलेश कुमार सिंह, अतिरिक्त सचिव (ग्रामीण विकास) श्री टी.के.अनिल कुमार, संयुक्त सचिव (ग्रामीण रोजगार) सुश्री रोहिणी आर. भाजीभाकरे और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और नागरिक समाज संगठनों के अन्य हितधारकों ने भाग लिया।

श्री चौहान ने पिछले कुछ वर्षों में योजना की महत्वपूर्ण उपलब्धियों की सराहना की। इस वर्ष, 201 करोड़ से अधिक व्यक्ति दिवस सृजित किए गए हैं, जिससे पाँच करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को रोजगार मिला है। 63 लाख से अधिक ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण किया गया है और कृषि और कृषि-संबद्ध गतिविधियों, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और कमजोर परिवारों के लिए आजीविका के अवसरों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए लगभग 78,132 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। मंत्री ने महात्मा गांधी नरेगा में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी पर भी प्रकाश डाला, जिसमें आधे से अधिक श्रमिक महिलाएं हैं। यह महिला सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विचार-विमर्श सत्र, ग्रामीण विकास योजनाओं को 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण के साथ जोड़ने के मंत्रालय के व्यापक प्रयासों का हिस्सा था, जो कि अमृत काल, भारत के परिवर्तन और विकास की अवधि के दौरान है। श्री चौहान ने ग्रामीण विकास, गरीबी उन्मूलन और हाशिए पर पड़े समुदायों के सशक्तिकरण में महात्मा गांधी नरेगा की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और इसके प्रभाव को आगे बढ़ाने के लिए एक व्यापक रोडमैप बनाने का आह्वान किया।
श्री चौहान ने कहा कि मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री रहते हुए मैंने एक प्रयोग किया था कि किसी भी योजना को बनाने से पहले उससे संबंधित लोगों की पंचायत बुलाते थे। जैसे कि किसानों के बारे में कोई योजना बनानी होती थी तो किसानों की पंचायत और अगर महिलाओं के बारे में कोई योजना बनानी हो तो बहनों को बुलाते थे। उन्होंने कहा कि मैं यह मानता हूं कि हम जिसके कल्याण के लिए रोज़गार चला रहे हैं और जो योजना का कार्यान्वयन कर रहे हैं जब तक उनसे चर्चा नहीं करेंगे तब तक सही फीडबैक नहीं मिलेगा। काम करने वालों को जितनी समस्या समझ आ रही है वह अधिकारियों को उतनी समझ में नहीं आ रही होती है। योजना का कार्यान्वयन करने वाले और योजना की मॉनिटरिंग करने वाले उसके बारे में अच्छे से बता सकते हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया गया कि महात्मा गांधी नरेगा की सफलता में जन भागीदारी और पारदर्शिता का विशेष स्थान है। महात्मा गांधी नरेगा की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए सामाजिक लेखा परीक्षा के माध्यम से इसकी निगरानी में ग्राम सभा और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।
सत्र का विषय महात्मा गांधी नरेगा में चल रहे डिजिटल परिवर्तन पर था, जो मजदूरी का समय पर भुगतान और योजना की प्रभावी निगरानी और कार्यान्वयन सुनिश्चित करता है। केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने कहा कि आप सब जानते हैं कि मनरेगा ग़रीब बहनों और भाईयों के लिए एक बहुत उपयोगी योजना है जिसके तहत एक निश्चित अवधि तक काम उपलब्ध कराते हैं। कई जगह से शिकायत आती है कि जियो टैगिंग होने के बावजूद भी आदमी की जगह मशीन से काम होता है। श्री चौहान ने कहा कि यह भी देखने में आया है कि योजना किसी और काम के लिए चल रही होती है लेकिन उससे काम कुछ और हो रहा होता है। मनरेगा का एक बहुत लाभकारी प्रयोग हितधारकों को लाभान्वित करना हुआ है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनेगा ही। श्री चौहान ने राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (एनएमएमएस)] जियो-टैगिंग] जीआईएस-आधारित मैपिंग] अनुमानों की ऑनलाइन तैयारी के लिए सिक्योर सॉफ्टवेयर और आधार-आधारित भुगतान प्रणाली जैसे तकनीकी हस्तक्षेपों की सराहना की] जो अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कर रहे हैं।
सत्र के दौरान समय पर मजदूरी भुगतान, बॉटम-अप योजना, महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत अधिकार और हक, प्रौद्योगिकी का उपयोग, जॉब कार्ड से संबंधित मुद्दे, कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी तथा शिकायत निवारण तंत्र से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कोविड के समय में भी मनरेगा के तहत ही कई लोग अपनी आजीविका को चला पाये। उस समय 1 लाख 18 या 19 हजार करोड़ रूपये तक इसका बजट था। इस साल का बजट 86 हजार करोड़ रूपये का है लेकिन अब वह भी खत्म होने वाला है। उन्होंने कहा कि जहां सुधार की गुंजाईश है वहां सुधार होना चाहिए। इतनी बड़ी धनराशि का सार्थक उपयोग भी होना चाहिए। मनरेगा का काम मांग पर आधारित है और इसमें कम और ज़्यादा मांग पर आधारित होना चाहिए। इस योजना में जो विसंगतियां हैं वह दूर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत ऐसे काम हों जो उपयोगी व जनकारी हों। इस योजना में सभी अच्छाईयों के बावजूद भी जहां सुधार की आवश्यकता हो उसे कर लेना चाहिए जिससे हम और बेहत्तर कर सकें।
श्री चौहान ने सभी हितधारकों के प्रति उनके बहुमूल्य योगदान के लिए आभार व्यक्त करते हुए सत्र का समापन किया। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान साझा की गई अंतर्दृष्टि महात्मा गांधी नरेगा के कार्यान्वयन और निगरानी में चुनौतियों और सुधारों को संबोधित करने के लिए भविष्य के नीतिगत निर्णयों के दौरान सहायक होगी।




