
रिपोर्टर :- उज्जवल कुमार साहा
साहिबगंज। राजमहल मॉडल कॉलेज में शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का विधिवत शुभारंभ किया गया। “AI for Skill Development in Developing Countries” विषय पर आयोजित इस सेमिनार के पहले दिन देश-विदेश के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों एवं शोधार्थियों ने भाग लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम की शुरुआत महान स्वतंत्रता सेनानी सिदो-कान्हु मुर्मू के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिससे वातावरण पूरी तरह प्रेरणादायी बन गया। इसके बाद प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र, शॉल, स्मृति चिह्न एवं पुष्पगुच्छ देकर गर्मजोशी से स्वागत किया।
सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में सिदो-कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका के कुलपति प्रो. (डॉ.) राम कुमार सिंह ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में AI जीवन के हर क्षेत्र में तेजी से अपनी जगह बना रहा है। उन्होंने इसके सकारात्मक उपयोग पर बल देते हुए चेतावनी भी दी कि इसके दुरुपयोग से बचने के लिए संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है।
सेमिनार के की-नोट स्पीकर डॉ. हेले (यूके) ने भी वर्चुअल माध्यम से अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्तमान आईटी युग में अधिकांश कार्य AI-गाइडेड हो चुके हैं, जिससे कार्यों की गति और दक्षता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने युवाओं को अपने पैशन और करियर के अनुसार AI टूल्स के उपयोग की सलाह दी।
डॉ. राजेश सोलोमन पॉल ने AI को वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र में रोजगार और करियर की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। वहीं मो. केताबुद्दीन शेख ने कहा कि आज हर व्यक्ति के लिए AI की बुनियादी जानकारी आवश्यक हो गई है।
शिबू सोरेन जनजातीय महाविद्यालय, बोरियो के प्रभारी प्राचार्य डॉ. नजरुल इस्लाम ने AI के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता जताई।
सिदो-कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजीव रंजन शर्मा ने कहा कि AI शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान, रक्षा और कृषि सहित सभी क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है और इसके सकारात्मक उपयोग को अपनाना समय की मांग है।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने कहा कि AI को अंततः मानव बुद्धिमत्ता (HI) ही नियंत्रित करती है। उन्होंने कहा कि AI के माध्यम से व्यक्ति अपने कौशल और रुचियों को नई दिशा दे सकता है और भविष्य को बेहतर बना सकता है।
कार्यक्रम में एडीओ सदानंद महतो ने भी भाग लिया और ऐसे आयोजनों को युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया। सेमिनार के दौरान छात्र प्रणव ने ग्रामीण चिकित्सा क्षेत्र में विकसित अपने AI मॉडल का लाइव डेमोंस्ट्रेशन प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
इसके साथ ही सेमिनार स्मारिका (सोविनियर) का भी विधिवत विमोचन किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रमजान अली ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमित कुमार ने दिया। विभिन्न सत्रों में शोधार्थियों एवं फैकल्टी सदस्यों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए, जिनमें AI के विविध आयामों पर चर्चा हुई।
सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र का पुरस्कार डॉ. ऋत्विक प्रिय को प्रदान किया गया। वहीं डॉ. शैलेश मिश्र ने अपने शोध में AI क्रांति के भविष्य में संभावित व्यापक प्रभावों को रेखांकित किया।
इस अवसर पर इंटरनेशनल वोकेशनल ट्रेनिंग एंड टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधि डॉ. केतन मिश्र, श्रीमती मौसमी सरकार, सुश्री निशु कश्यप एवं सुश्री प्रिया संतप्त सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
साथ ही रणधीर सिंह, डॉ. धुर्व ज्योति कुमार सिंह, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. चन्द्रशेखर प्रसाद, डॉ. सोनू, डॉ. मरियम हेम्ब्रम, डॉ. सेमी मरांडी, डॉ. मेरी मुर्मू, मुस्कान, डॉ. सुब्रत सिंह, राज कुमार सिंह समेत सैकड़ों छात्र-छात्राएं, शिक्षक, कर्मचारी एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों द्वारा वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। यह सेमिनार न केवल शैक्षणिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण साबित हो रहा है, बल्कि क्षेत्र के युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।




