
रिपोर्टर:- उज्जवल कुमार साहा
साहिबगंज। पूर्व रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। इन विकास कार्यों का उद्देश्य यात्रियों के सफर को अधिक सुगम, तेज और सुरक्षित बनाना है।
रेलवे द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मालदा टाउन, दुर्गापुर, शंकरपुर, पाकुड़ और खाना समेत पांच प्रमुख स्टेशनों पर यार्ड के पुनर्निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं। इन सुधारों से ट्रेनों की आवाजाही में तेजी आएगी और बाहरी सिग्नलों पर यात्रियों के इंतजार का समय कम होगा।
इसके साथ ही, टिकानी-धौनी, धौनी-बाराहाट, मंदारहिल-हंसडीहा और मणिग्राम-महिपाल रोड खंडों के बीच चार मध्यवर्ती ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम भी शुरू किए गए हैं, जिससे सुरक्षा और लाइन क्षमता में वृद्धि होगी।
रेलवे ने करीब ₹8,381.99 करोड़ की लागत से 454 किलोमीटर से अधिक लंबी आठ प्रमुख मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में डानकुनी-बाल्टीकुड़ी, मुरारई-बड़हरवा, साईंथिया-पाकुड़ और पाकुड़-गुमानी जैसे व्यस्त रेल मार्गों पर तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण शामिल है। इसके अलावा रानाघाट-कृष्णानगर और भागलपुर-जमालपुर के लिए तीसरी लाइन, जबकि भागलपुर-दुमका-रामपुरहाट और रानाघाट-बनगांव खंडों में दोहरीकरण परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, रेलवे ने सिउरी-नाला (राजनगर व बक्रेश्वर धाम के रास्ते), आरामबाग-खानकुल नई लाइन तथा चंपापुकुर-हसनाबाद और लक्ष्मीकांतपुर-नामखाना खंडों के दोहरीकरण के लिए अंतिम स्थान सर्वेक्षण को भी मंजूरी दी है।
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि ये परियोजनाएं रेल यात्रा के अनुभव को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। उन्होंने बताया कि मल्टी-ट्रैकिंग और यार्ड आधुनिकीकरण के जरिए रेलवे न सिर्फ ट्रैक बढ़ा रहा है, बल्कि यात्रियों को तेज, सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा भी सुनिश्चित कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि ₹8,000 करोड़ से अधिक का यह निवेश भारत के पूर्वी क्षेत्र—पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड—में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

