
रिपोर्ट :- उज्जवल कुमार साहा,
गंगा स्नान के साथ न्याय की जानकारी, माघी मेला में जिला विधिक सेवा प्राधिकार का जागरूकता स्टाॅल।
आस्था के संग अधिकारों की सुरक्षा, माघी मेला में जिला विधिक सेवा प्राधिकार साहिबगंज का विधिक संदेश।
साहिबगंज। ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी राजमहल में आयोजित सुप्रसिद्ध माघी मेला के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को केवल आध्यात्मिक शांति ही नहीं, बल्कि उनके अधिकारों के प्रति सजग करने की एक सराहनीय पहल की गई है। माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, साहिबगंज अखिल कुमार के मार्गदर्शन में मेला परिसर में एक विशेष विधिक सहायता एवं जागरूकता स्टाल लगाया गया है।
प्राधिकार के सचिव विश्वनाथ भगत ने स्टाॅल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कानूनी सहायता अब आपके द्वार की अवधारणा के तहत यह स्टाॅल स्थापित किया गया है। गंगा स्नान के लिए आने वाले हजारों श्रद्धालुओं एवं स्थानीय आमजन को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराना तथा उन्हें सरकार की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में अक्सर ग्रामीण एवं कमजोर वर्ग अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं, जिसे दूर करने का यह प्रभावी प्रयास है।
स्टाॅल की प्रमुख गतिविधियों में मौके पर कानूनी परामर्श (लीगल एड) प्रदान किया जा रहा है, जहां कानूनी समस्याओं या लंबित मामलों से जुड़े लोगों को पैरा लीगल वॉलंटियर्स – न्याय मित्रों द्वारा तत्काल उचित सलाह दी जा रही है। इसके साथ ही आम जनता को लोक अदालत, मध्यस्थता के लाभ, बच्चों एवं महिलाओं से संबंधित सख्त कानूनों तथा मौलिक अधिकारों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

स्टाॅल पर आने वाले लोगों के बीच कानूनी नियमों, सरकारी योजनाओं एवं प्रक्रियाओं से संबंधित पैम्पलेट एवं पुस्तिकाओं का वितरण भी किया जा रहा है। साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे पेंशन, राशन, स्वास्थ्य एवं अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उठाने की प्रक्रिया एवं पात्रता की जानकारी दी जा रही है, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति लाभ से वंचित न रहे।
मेला परिसर में लगाए गए इस विधिक सहायता स्टाॅल पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ देखी जा रही है। दूर-दराज से आए लोग न केवल गंगा में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं, बल्कि इस स्टाॅल के माध्यम से अपनी कानूनी उलझनों का समाधान भी प्राप्त कर रहे हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की यह पहल सामाजिक न्याय एवं विधिक सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी और सराहनीय कदम के रूप में देखी जा रही है।

