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धान की पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश….।

 

रिपोर्ट :- शिवा वर्मा (संपादक)

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीएएंडएफडब्ल्यू) 2018-19 से क्रियान्वित फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत धान की पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के प्रयासों का मुख्य रूप से समर्थन कर रहा है, जिसमें धान की पराली के इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

इस योजना के तहत, फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी की खरीद के लिए किसानों को मशीन की लागत का 50 प्रतिशत और 30 लाख रुपये तक की लागत वाली परियोजनाओं के लिए 80 प्रतिशत की दर से वित्तीय सहायता ग्रामीण उद्यमियों (ग्रामीण युवा और उद्यमी के रूप में किसान), किसानों की सहकारी समितियों, पंजीकृत किसान समितियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और पंचायतों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) की स्थापना के लिए प्रदान की जाती है। यह योजना फसल अवशेषों के इन-सीटू प्रबंधन के लिए सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्मार्ट सीडर, सरफेस सीडर, जीरो टिल सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल आदि जैसी मशीनों और उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देती है और आगे के उपयोग के लिए पुआल को इकट्ठा करने के लिए बेलर और स्ट्रॉ रेक को बढ़ावा देती है।

इन राज्यों में उत्पन्न धान की पराली के कुशल बाहरी प्रबंधन को सक्षम करने के उद्देश्य से, 1.50 करोड़ रुपये तक की लागत वाली मशीनरी की पूंजीगत लागत पर 65% की दर से वित्तीय सहायता के साथ धान की पराली की आपूर्ति श्रृंखला के लिए परियोजनाएं स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। इस हस्तक्षेप का उद्देश्य बायोमास बिजली उत्पादन और जैव ईंधन क्षेत्रों में विभिन्न अंतिम उपयोगकर्ता उद्योगों के लिए धान की पराली की एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करना है।

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इस योजना के अंतर्गत, 2018-19 से 2024-25 (28 फरवरी 2025 तक) की अवधि के दौरान, इन राज्यों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) को 3698.45 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। राज्यों ने फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के 41,900 से अधिक सीएचसी स्थापित किए हैं और इन सीएचसी और इन राज्यों के व्यक्तिगत किसानों को 3.23 लाख से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें आपूर्ति की गई हैं।

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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के कृषि भौतिकी प्रभाग, अंतरिक्ष से कृषि पारिस्थितिकी तंत्र निगरानी एवं मॉडलिंग पर अनुसंधान के लिए कंसोर्टियम (सीआरईएएमएस) प्रयोगशाला द्वारा जारी रिपोर्टों के अनुसार, पिछले वर्ष 15 सितंबर से 30 नवंबर के बीच पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश राज्यों में धान की पराली जलाने की घटनाएं 42962 थीं, जो इसी अवधि के लिए 2024 के दौरान घटकर 18457 रह गई हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में धान की पराली जलाने में 57 प्रतिशत की कमी दर्शाता है।

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यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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