बेजुबानों की जुबान बन कर व्यक्ति हर युग में एक उच्च मिशाल कायम करता रहा है।

बाराबंकी। बेजुबानों की जुबान बन कर व्यक्ति हर युग में एक उच्च मिशाल कायम करता रहा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बेजुबानों में स्वयं भगवान विद्यमान माने जाते हैं।किसी असहाय के दर्द में सेवा करना भगवान की सेवा कहलाता है।इसी प्रकार गौ पशु की पीड़ा को कम करने का प्रयत्न सोशल एक्टिविस्ट व ग्रीन गैंग राज्य प्रभारी सूरज सिंह गौर ने किया है।
बताते चलें कि सूरज के सामाजिक जीवन की शुरुआत एक बेजुबान असहाय की मदद से हुआ था।जिसके साथ प्रारंभ हुई सामाजिक जीवन की यात्रा लगातार बेजुबान, लाचार पशुओं पशुओं की देखभाल में अग्रसर है।सूरज सिंह बेजुबानों की सहायता के लिए आई०ए०एस० उदयभानु त्रिपाठी से रेड क्रॉस सम्मान भी पा चुके हैं। बाराबंकी स्थित गांधी भवन के बाहर देर रात एक गौ पशु दर्द से व्याकुल था।जिसके पीठ से रक्त की धारा बह रही थी।जिसको सूरज सिंह गौर ने देखा। तत्काल जिला पशु चिकित्सा अधिकारी जितेंद्र नाथ पाण्डेय को सुचित किया।कुछ ही समय बाद पशु कार्यालय से श्रवण कुमार व रामसेवक मौके पर आ पहुंचे। प्रार्थमिक उपचार करते हुए बताया कि इस पर गर्म तेल डाला गया है जिसके इसकी ये दशा हुई है।हम इंजेक्शन और दवा डाल दें रहे हैं। उम्मीद है जल्दी स्वस्थ हो जाएगा।इस प्रकार एक असहाय पशु के दर्द को समझ कर सूरज उसकी दवा बने।इस मौके पर पत्रकार सुमंगल द्वीप त्रिवेदी भी मौजूद रहे।




