बाकर सिंह रावत की वीरता और बलिदान नई पीढ़ी के लिए न सिर्फ गौरवशाली है बल्कि प्रेरणादायक भी है।
जहांगीराबाद स्टेट पर आक्रमण करने आयी अंग्रेजी फौजों के 56 सिपाहियों को मौत के घाट उतारकर अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए थे।

रिपोर्ट :- शिवा वर्मा।
बाराबंकी। स्वाधीनता संग्राम में विकास खण्ड मसौली के शम्साबाद गांव के त्याग-बलिदान की गाथा रोंगटे खड़े कर देने वाली है। बाकर सिंह रावत की वीरता और बलिदान नई पीढ़ी के लिए न सिर्फ गौरवशाली है बल्कि प्रेरणादायक भी है।
उक्त विचार आजादी के अमृत महोत्सव अन्तर्गत शमसाबाद ग्राम में आयोजित प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अमर महानायक बाकर सिंह रावत के स्मृति समारोह में अवधी अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष प्रदीप सारंग ने व्यक्त किये।
भावांजलि कार्यक्रम में समाजसेवी चाइल्ड लाइन के निदेशक रत्नेश कुमार ने कहा कि इतिहास विजेताओं का होता है, ऐसे तमाम गुमनाम हैं जिन्होंने आजादी के यज्ञ में अपनी आहूति दी है।
उनमें से शमशाबाद निवासी शहीद बाकर सिंह रावत हैं जिन्होंने जहांगीराबाद स्टेट पर आक्रमण करने आयी अंग्रेजी फौजों के 56 सिपाहियों को मौत के घाट उतारकर अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए थे। इस घटना के प्रतिशोध में अंग्रेजी फौज ने गांव के सभी लोगों को तोप से उड़ा दिया था।
आज उनके बलिदान को यादकर गांववासी गौरव की अनुभूति कर रहे हैं। कार्यक्रम के संयोजक शमशाबाद निवासी दिनेशचंद्र रावत ने कहा कि आजादी के आंदोलन में शमशाबाद गांव के बलिदान को भुलाया नही जा सकता है।
कार्यक्रम में गांव के निवासी बुजुर्ग शांति स्वरूप ने बाकर सिंह की प्रचलित घटनाओं को बताया। कार्यक्रम का संचालन सुशील रावत ने किया। इस अवसर पर अमरेश बहादुर, गंगाराम, सहदेव प्रसाद, पूर्व जिप सदस्य गीता रावत, विनय कुमार रावत आदि सैकड़ों महिला पुरूष उपस्थित रहे। इस मौके पर गांव में तिरंगा यात्रा निकाली गई।




