माताओं ने निर्जला व्रत रखकर अपने पुत्र की दीर्घायु होने की कामना की जय श्री गणेश

बिशेष संवाददाता मान बहादुर सिंह
बाराबंकी।।जनपद के लगभग सभी हिंदू परिवारों में माताओं ने संकट चौथ का निर्जला व्रत रखकर पुत्र के दीर्घायु होने की कामना की ज्ञात हो कि संकष्टी चौथ के पावन पर्व पर महिलाओं ने सुबह से ही निर्जला व्रत रखकर अपने पुत्र के लंबी आयु के लिए संकट चौथ का व्रत रखा इस पावन पर्व के शुभ अवसर पर महिलाओं ने सुबह स्नान के पश्चात निर्जला व्रत रखकर रात्रि करीब 9:00 बजे के बाद निर्जला व्रत का उपवास तोड़ा कई स्थानों पर महिलाएं इस दिन कुछ खाया ही नहीं वहीं कुछ स्थानों पर महिलाएं व्रत तोड़ने के बाद तिल के बने लड्डू खाकर व्रत पूर्ण करते हैं मूंगफली और फलाहार शकरकंद का सेवन करके उपवास तोड़ा स्वच्छ मन के साथ-साथ गणेश भगवान की प्रतिमा को ईशान कोण मैं एक चौकी पर स्थापित किया विघ्न विनाशक भगवान गणेश का अपने जीवन के सबसे बड़े संकट से निकलकर आए थे इसलिए इसे संकट चौथ कहा जाता है एक बार मां पार्वती स्नान के लिए गई तो उन्होंने दरबार पर गणेश जी को खड़ा कर दिया और किसी को अंदर आने के लिए मना किया यहां तक की भगवान गणेश ने अपने पिता शिव शंकर भगवान को भी अंदर आने से रोक दिया भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने त्रिशूल से गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया पुत्र का यह हाल देखा तो माता पार्वती विलाप करने लगी और अपने पुत्र गणेश भगवान को जीवित करने का हठ करने लगी और अपने पुत्र को जीवित करने के लिए भगवान शिव से अनुरोध किया उस कटेसर पर भगवान गणेश का हाथी का सिर लगाकर दूसरा जीवन दिया तब से गणेश विघ्न विनाशक गजानन कहना ने लगे इस दिन से भगवान गणपत की प्रथम पूज्य के रूप में आराधना की जाने लगी तभी से यह तिथि गणपत पूजन की तिथि बन गई इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने के ऊपर कभी कोई संकट नहीं आता है संकट चौथ महिलाओं ने पूरे विधि विधान निर्जला व्रत रखकर विघ्न विनाशक भगवान गणेश से अपने पुत्र की दीर्घायु होने की कामना की और आशीर्वाद प्राप्त किया




