
रिपोर्टर :- उज्जवल कुमार साहा
साहिबगंज जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे राजमहल क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। राजमहल थाना क्षेत्र के सरकंडा गांव में गंगा नदी में डूबने से दो सगे भाइयों की मौत हो गई। जो परिवार कुछ दिन पहले तक होली की खुशियां मना रहा था, आज वहां केवल चीख-पुकार और सन्नाटा पसरा है। गुरुवार दोपहर से लापता इन बच्चों के शव लगभग 16 घंटे बाद शुक्रवार सुबह नमामि गंगे घाट के पास से मिले।
दोपहर में खेलने निकले थे बच्चे, फिर नहीं लौटे
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरकंडा निवासी सेटू चौरसिया के दो मासूम पुत्र— 8 वर्षीय आर्यन कुमार और 4 वर्षीय राघव कुमार— गुरुवार दोपहर करीब 1 बजे अपने घर के बाहर खेल रहे थे। खेलते-खेलते दोनों बच्चे अचानक सबकी नजरों से ओझल हो गए। शुरुआत में परिजनों को लगा कि बच्चे आसपास ही कहीं खेल रहे होंगे, लेकिन जब घंटों बीत जाने के बाद भी वे घर नहीं लौटे, तो माता-पिता के हाथ-पांव फूलने लगे। पूरे गांव में शोर मच गया और ग्रामीणों ने मिलकर बच्चों की खोजबीन शुरू की। जैसे-जैसे शाम ढलती गई, परिजनों का डर बढ़ता गया। उन्हें किसी अनहोनी या अपहरण जैसी आशंकाएं सताने लगी थीं।
नदी किनारे मिले कपड़ों ने जगाया अनहोनी का डर
परिजनों और ग्रामीणों की तलाश गुरुवार रात करीब 9 बजे एक निर्णायक मोड़ पर पहुंची। नमामि गंगे घाट के पास खोजबीन के दौरान एक बच्चे की पैंट मिला। कपड़े देखते ही परिजनों का कलेजा मुंह को आ गया। अब यह शक यकीन में बदल चुका था कि बच्चे खेलते हुए गंगा नदी की ओर चले गए थे और संभवतः गहरे पानी में डूब गए। स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों ने रात के अंधेरे में ही जाल डालकर नदी में तलाश शुरू की, लेकिन रात भर चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई सफलता नहीं मिली।
सुबह दोनों मासूमों के शव शुक्रवार की सुबह जैसे ही उजाला हुआ, घाट के पास एक बच्चे का शव पानी की सतह पर तैरता हुआ दिखाई दिया। यह खबर जंगल में आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते घाट पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई। कुछ ही देर बाद, स्थानीय लोगों की मदद से दूसरे बच्चे का शव भी थोड़ी दूरी पर बरामद कर लिया गया। मौके पर पहुंची राजमहल थाना के पुलिस ने तुरंत स्थिति को संभाला और दोनों मासूमों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडलीय अस्पताल भेज दिया।
मुंबई से गांव आए थे खुशियां बांटने, मिला ता उम्र का गम
इस घटना का सबसे दुखद पहलू है कि मृतक बच्चों के पिता, सेटू चौरसिया, मुंबई में रहकर मजदूरी करते हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उन्होंने रुंधे गले से बताया कि वह कई सालों के लंबे अंतराल के बाद पूरे परिवार के साथ होली का त्योहार मनाने अपने पैतृक गांव आए थे। होली बीत हो चुकी थी और परिवार वापस मुंबई लौटने की तैयारी कर रहा था। उन्हें क्या पता था कि गांव की यह मिट्टी उन्हें ताउम्र का ऐसा जख्म दे जाएगी जो कभी नहीं भरेगा।
अस्पताल परिसर में बिलखती हुई मां की करुण पुकार सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। मां बार-बार एक ही बात कह रही थी— “मेरे दो ही तो बेटे थे, अब मेरे बुढ़ापे का सहारा छिन गया। भगवान ने हमारे साथ ऐसा क्यों किया?”
प्रशासन की अपील
इस दुखद हादसे के बाद प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे छोटे बच्चों को नदी या तालाबों के किनारे अकेला न छोड़ें, विशेषकर गर्मी के मौसम में जब बच्चे पानी की ओर आकर्षित होते हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम के बाद शवों को परिजनों को सौंप दिया जाएगा।


