शिक्षक बच्चों को पाठ्यक्रम के साथ साथ जीवन के गुण भी सिखाये।(प्राचार्य अमिता सिंह)

रिपोर्ट :-आकांक्षा वर्मा।
बाराबंकी। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान गणेशपुर बाराबंकी 5 अगस्त से 8 अगस्त 2024 तक चलने वाले जीवन कौशल प्रशिक्षण का भव्य समापन समारोह गुरुवार को हुआ।

उप शिक्षा निदेशक/ प्राचार्य अमिता सिंह के कुशल निर्देशन एवं मार्गदर्शन में चार दिवसीय जीवन कौशल प्रशिक्षण में 200 परिषदीय अध्यापकों ने सफलतापूर्वक प्रतिभाग किया। प्राचार्य अमिता सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि 21 वीं सदी नए आयामों, नए अवसरों एवं अद्भुत नवाचारों का युग है जिससे शिक्षा प्रणाली में बहुत बड़ा बदलाव आया है। जीवन को सरल और सहज बनाने के लिए जीवित रहने की रणनीति ही पर्याप्त नहीं होगी। बच्चों को विशेष कौशल की आवश्यकता होती है जिन्हें बहुत कम उम्र में ही सिखाया और विकसित किया जाना चाहिए।

इसमें स्वजागरूकता, पारस्परिक सम्बंध कौशल, सम्प्रेषण कौशल, समस्या समाधान कौशल, निर्णय निर्माण, समालोचनात्मक चिंतन, सृजनात्मक कौशल, तनाव प्रबंधन भावना प्रबंधन ,आदि सिखाया जाना आवश्यक है, हम सभी को सहानुभूति के साथ साथ समानुभूति कौशल का विकास करना चाहिए।
प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से नोडल प्रवक्ता श्रीमती कीर्ति अवस्थी द्वारा’ पारस्परिक सम्बंध कौशल, तनाव प्रबंधन, और समलोचनात्मक चिंतन को प्रभावशाली ढंग से प्रतिभागियो को सिखाया गया। सम्प्रेषण कौशल व समस्या समाधान कौशल के लिए संदर्भदाता लक्ष्मी सिंह व प्रीती वर्मा द्वारा प्रतिभागियों के मध्य प्रभावशाली ढंग से चर्चा परिचर्चा हुई। सन्दर्भदाता अमरजीत सिंह, महिमा सिंह द्वारा निर्णय निर्माण और साहनुभूति से ऊपर समानुभूति कौशल से संबंधित गुणों को सहज ढंग से प्रस्तुत किया गया। सन्दर्भदाता धर्मराज और सीमा सलवानी ने स्वजागरूकता, सृजनात्मककौशल के बारे मे सिखाया. प्रवक्ता अमित राय और महेंद्र यादव ने जीवन कौशल को स्कूलों के पाठ्यक्रम से जोड़कर महत्व बताया।

पुरे प्रशिक्षण से प्रतिभागियों ने स्वयं गुण को पहचानने में, सफल रहे। पारस्परिक संबंध को बढ़ाने, समस्या के विभिन्न पहलुओं को समझकर निराकरण करने वा एकदूसरे से नवाचार सीखा। प्रशिक्षण प्रतिभागियों में संदीप, अनुराधा, विनीता जायसवाल, प्रज्ञा, अचल सिंह, उपेंद्र, शेर बहादुर सिंह, गौरी रस्तोगी समेत सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।





