14 अगस्त ‘‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’ पर अभिलेख-प्रदर्शनी व मौन जुलूस का हुआ आयोजन।
जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी सहित अधिकाधिक संख्या में जनमानस हुए विभाजन विभीषिका मौन जुलूस में शामिल।

नगर पालिका टाउन हॉल में ‘‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’ के अवसर पर डाक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन।
भारत का विभाजन अभूतपूर्व मानव विस्थापन और मजबूरी में पलायन की दर्दनाक कहानी है- राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा।
जनपद में विभिन्न संस्थाओं/विभागों द्वारा निकाला गया विभाजन विभीषिका मौन जुलूस।
रिपोर्ट :- शिवा वर्मा
बाराबंकी। स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर 14 अगस्त को ‘‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’ पर जिलाधिकारी डॉ आदर्श सिंह के मार्गदर्शन में टाउन हॉल नगर पालिका में ‘‘अभिलेख प्रदर्शनी’’ व टाउन हॉल नगर पालिका से शहीद पार्क तक ‘‘मौन जुलूस’’ का आयोजन किया गया। अभिलेख प्रदर्शनी का उद्घाटन श्री सतीश चंद्र शर्मा मा. राज्यमंत्री खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति विभाग, मा. सांसद श्री उपेन्द्र सिंह रावत, मा. जिला पंचायत अध्यक्षा श्री मती राजरानी रावत द्वारा संयुक्त रूप से किया गया ।

राज्यमंत्री ने विभाजन विभीषिका पर अभिलेख प्रदर्शनी का अवलोकन किया। राज्यमंत्री ने मा0 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का संदेश पढ़ा जिस पर लिखा था ‘‘देश के बटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाईयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गवानी पड़ी। उन लोगों के संघर्ष एवं बलिदान के याद में 14 अगस्त को ‘‘विभाजन विभीषिता स्मृति दिवस’’ के तौर पर मनाया जा रहा है।
अभिलेख प्रदर्शनी में ‘‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’ की पृष्ठ भूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि भारत का विभाजन अभूतपूर्व मानव विस्थापन और मजबूरी में पलायन की दर्दनाक कहानी है। यह एक ऐसी कहानी है जिसमें लाखों लोग अजनबियों के बीच एकदम वितरित वातावरण में नया आशियाना तालाश रहे थे। विश्वास व धार्मिक आधार पर एक हिंसक विभाजन की कहानी होने के अतिरिक्त यह एक बात की भी कहानी है, कैसे एक जीवन शैली एक वर्षो पुराने सह-अस्तिव का युग अचानक और नाटकी रूप से समाप्त हो गया।

लगभग 60 लाख गैर मुस्लमान उस क्षेत्र से निकल आए, जो बाद में पश्चिमी पाकिस्तान बन गया। 65 लाख मुसलमान पंजाब, दिल्ली, आदि के भारतीय हिस्सों से पश्चिमी पाकिस्तान चके गये थे। 20 लाख गैर मुसलमान पूर्वी बंगाल, जो बाद में पूर्वी पाकिस्तान बना, से निकल कर पश्चिम बंगाल आए, 1950 में 20 लाख और गैर मुस्लमान पश्चिम बंगाल आए। 10 लाख मुसलमान पश्चिम बंगाल से पूर्वी पाकिस्तान चले गये। इस विभीषिका में मारे गये लोगों का आकड़ा 5 लाख बताया जाता है। लेकिन अनुमानतः यह आकड़ा पॉच से 10 लाख के बीच है।
उपरोक्त मार्मिक दस्तां की कहानी को जिला प्रशासन द्वारा अभिलेख प्रदर्शनी में जीवंत किया गया,। इसके साथ ही मा. राज्यमंत्री सहित सभी ने विभाजन विभीषिका पर आधारित डाक्यूमेंट्री फिल्म को देखा।

जिला प्रशासन के साथ टाउन हॉल नगर पालिका से शहीद पार्क तक जनमानस द्वारा मौन जुलूस के रूप में व्यक्त किया गया। अभिलेख प्रदर्शनी से आम जनमानस को विभाजन की विभीषिका के विविध आयाम और जानकारियों से रूबरू हुए। प्रदर्शनी में विभाजन से सम्बन्धित विविध बैठके, कान्फ्रेस जनसभा आम लोगो की जीवन की विपदा आदि प्रसंगों को प्रदर्शित किया गया । ताकि आमजन मानस भी विभाजन की त्रासदी को समझते हुए देश की प्रगति में योगदान सुनिश्चित कर सकें। विभाजन विभीषिका की दास्ता को मा0 राज्यमंत्री, मा. सांसद, जिला पंचायत अध्यक्षा, ने जनता को समझाया। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित प्रदर्शनी व मौन जुलूस में अधिकारीगण, कर्मचारीगण सहित जनता जनार्दन ने सहभागिता की।




