लखनऊ की सुप्रसिद्ध साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थान “लक्ष्य” के तत्वावधान में एक विराट काव्य समारोह का हुआ आयोजन

लखनऊ दिनांक 28, नवम्बर 2021लखनऊ की सुप्रसिद्ध साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थान “लक्ष्य” के तत्वावधान में अवध कुंज पार्क, हजरतगंज लखनऊ में आज एक विराट काव्य समारोह का आयोजन हुआ।
जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार श्री कन्हैया लाल ने की । मुख्य अतिथि छंदकार सम्पत्ति कुमार मिश्र ‘भ्रमर बैसवारी’ विशिष्ट अतिथि गीतकार श्री अनिल शुक्ला ‘निडर’ थे । काव्य समारोह का आरम्भ कवयित्री श्रीमती भारती अग्रवाल ‘पायल’ की वाणी वन्दना व हास्य कवि पण्डित गोबर गणेश के सफल संचालन से हुआ ।
फतेहपुर के कविवर रामराज भारती ने आज के बदलते रिश्तों पर दोहा सुनाकर वाहवाही लूटी –
तांबा, पीतल, फूल, गुम, चली फाइबर थाल।
रिश्ते सब बॏने हुए, याद रही ससुराल ।
पण्डित बेअदब लखनवी ने सरकार द्वारा जारी एक रुपए के छोटे वाले सिक्के बिना किसी सरकारी आदेश के चलन से बाहर हो जाने पर सुनाया-
खोटा सिक्का भले ही चल जाए,
छोटा सिक्का यहाँ नहीं चलता !
गीतकार शीला वर्मा ‘मीरा’ ने यह सुन्दर गीत सुनाया :-
शब्दों को चुनकर के लाई पुष्पों की वरमाला।
मन के भाव हरे कर दे मानो वो मधु का प्याला
दोहाकार श्री अरविंद रस्तोगी ने यह सुंदर दोहा सुनाया
जगर मगर, दीपक लहर, प्रभु लौटे निज धाम।
अवधपुरी हंसकर कहे, बोलो जय श्री राम।।
तत्पश्चात कवियत्री सत्यम चोपड़ा ने योग पर यह कविता सुनाई
पियो मन योग का प्याला तो जीवन पथ सुधर जाए।
मिले रोगों से चिर मुक्ति व जीवन में बहार आए।।
काव्य समारोह का सफल संचालन कर रहे हास्य कवि गोबर गणेश ने आज की स्थितियों पर यह कविता सुनाई
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
आपस में बंटे हुए दिख रहे भाई,
लेकिन यह कह रहे
हम सब एक हैं भाई ।
काव्य समारोह में वाणी वंदना कर चुकी गीतकार भारतीय अग्रवाल पायल ने यह सुंदर श्रृंगार की कविता सुनाई
हर श्वास के सरगम सजाकर मन लुभाती तितलियां,
उड़ती रही हैं प्रेम से पल पल रिझाती तितलियां,
खिलती सुमन के बीच मिलते क्रूर कंटक भी रहे,
लेकिन सदा मिलती रही यह मुस्कुराती तितलियां ।
छंदकार *शरद कुमार पाण्डेय ‘शशांक’* ने यह कविता सुनाई :-
निज देश की संपत्ति फूंक के मौज उड़ाते सदैव विदेश में हैं।
पहचानें कहो किस भांति उन्हें अब रावण राम के भेष में हैं।
देश के प्रसिद्ध गजलकार कुंवर कुसुमेश ने यह सुंदर गजल सुनाई
गलत कहते हैं कि आंधी से तूफानों से खतरा है
अगर सच है तो यॆ सच है कि इंसानों से खतरा है।
काव्य समारोह के विशिष्ट अतिथि अनिल शुक्ला निडर ने बच्चों पर योग की कथा सुनाई
बच्चों सीखो कूदना योग।
दूर भागेंगे सारे रोग।।
तन में फुर्ती आए जोश।
दौड़ोगे जैसे खरगोश।।
काव्य समारोह के मुख्य अतिथि छंदकार *भ्रमर बैसवारी* ने यह कविता सुनाई :-
कट पाती न बेड़ियां दासता की
यदि भारत बीच सुभाष ना होते ।
काव्य समारोह की अध्यक्षता कर रहे गीतकार कन्हैया लाल ने यह कविता सुनाई
दुख किसी का कोई बांट नहीं भले पाता है
दो पल के लिए मगर
सहानुभूति के शब्द परस्पर
कुछ तड़पन खो जाता है
दिल की बात कहो अपनों से, हल्का मन हो जाता है।
सभी कवियों एवं अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन संस्था के सांस्कृतिक मंत्री रामराज भारती ने किया ।
अंत में स्वर्गीय गीतकार
सतीश कुमार शजर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई




