दस लक्षण पर्व विशेष आठवां दिन – ‘उत्तम त्याग धर्म’ दान में हो हमेशा अच्छा भाव ।

रिपोर्ट :- शिवा वर्मा
बाराबंकी। हम सभी को अपने धर्म देश और समाज के लोगों के लिए दान करना चाहिए। हमें हर दिन मंदिर की दान पेटी में दान करना चाहिए। अगर मंदिर नहीं जा सकते तो समाज में किसी जरूरतमंद की मदद करनी चाहिए मुनि महाराज के लिए आहार, शास्त्र और औषधी दान करना चाहिए। दान को सर्वात्तम त्याग माना गया है महाराज विगुण सागर जी के सानिध्य में हो रहे दस लक्षण पर्व पर वह बता रहे थे कि आत्मा के राग द्वेष आदि कषाय बाबू का अभाव होना ही वास्तविक त्याग धर्म है।

चार प्रकार के दान भी इसी त्याग धर्म के अंतर्गत आते हैं साधना का सच्चा आनंद राग में नहीं अपितु त्याग में ही है। निस्वार्थ भाव से दिया गया दान ही त्याग धर्म है सांय काल की बेला में गुरु भक्ति, महा आरती का कार्यक्रम महिला मंडल द्वारा किया गया। तत्पश्चात लघु नाटिका श्वेश्या का धर्म श्श्रुति जैन द्वारा आयोजित किया गया। 8रू00 बजे से बच्चों की प्रतियोगिता ‘धार्मिक परिधान( फैंसी ड्रेस) का आयोजन किया गया। जिसमें 80 बच्चों ने भाग लिया। मुख्य 6 बच्चों में अणिमा जैन ,आयांश जैन,आव्या जैन, विदित जैन, शुभ्र जैन, काव्या जैन इसके अतिरिक्त निष्ठा जैन, सम्मेद जैन, दिव्य जैन, प्राप्ति जैन की भी भागीदारी रही। लघु नाटिका में रेखा जैन, रुचि जैन व आशु जैन में मुख्य रूप से भाग लिया।




