
रिपोर्टर :- उज्जवल कुमार साहा
राजमहल।साहिबगंज (झारखंड): आदिवासी समाज के प्रमुख पर्व सरहुल को लेकर जिले में उत्साह का माहौल है। आदिवासी संघर्ष सरना समिति, राजमहल सह साहिबगंज द्वारा 2026 के सरहुल पर्व की तैयारी जोर-शोर से शुरू कर दी गई है।
समिति के सदस्यों ने बताया कि इस वर्ष पर्व को पारंपरिक रीति-रिवाज और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भव्य तरीके से मनाने की योजना बनाई जा रही है। गांव-गांव में साफ-सफाई, सरना स्थल की सजावट और पूजा की तैयारियां की जा रही हैं।
समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, सरहुल आदिवासी समुदाय की प्रकृति पूजा का प्रतीक है, जिसमें साल वृक्ष की पूजा कर प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश दिया जाता है। इस मौके पर पारंपरिक नृत्य, गीत-संगीत और जुलूस भी निकाले जाएंगे।

स्थानीय लोगों और युवाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए बैठकें की जा रही हैं, ताकि पर्व को शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण माहौल में मनाया जा सके। प्रशासन से भी सहयोग की अपेक्षा जताई गई है।
समिति ने सभी लोगों से अपील की है कि वे सरहुल पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और आदिवासी संस्कृति एवं परंपरा को संरक्षित रखने में सहयोग दे।
अध्यक्ष सुखवा उरांव, उपाध्यक्ष राजेश बाड़ा, कार्यकरणी अध्यक्ष दिलीप उरांव, सचिव नेहरू टोप्पो, कोषाध्यक्ष संतलाल तिग्गा, निर्मल खलखो, मासी टुडू, धर्मवीर एक्का, बीरबल खाखा, मुकेश, काशी उरांव, संतोष बाड़ा, दिलीप टोप्पो, प्रताप उरांव, धर्मेंद्र मिंज, बासु उरांव, सुभाष तिग्गा, विरसा उरांव, साधु उरांव , मानू उरांव, जुरा उरांव हैं।

