लक्ष्य साहित्यिक संस्था की ई गोष्ठी सम्पन्न

लखनऊ 26.6.21।लक्ष्य साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थान द्वारा वीडियो कॉफ्रेंसिंग ऑनलाइन हास्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता हास्य कवि दिनेश चन्द्र अवस्थी जी ने की मुख्य अतिथि हास्य कवि श्याम जी मिश्र व विशिष्ट अतिथि डाॅ सुभाष गुरुदेव थे। वाणी वंदना कवयित्री ससुरी रेनू द्विवेदी व कवि सम्मेलन का सफल संचालन हास्य कवि गोबर गणेश ने किया ।
कवि सम्मेलन का प्रारंभ युवा हास्य कवि श्री आशुतोष तिवारी द्वारा ये कविता सुनाकर वाह वाही लूटी –
ख़ुशी से ही छलकता अब प्याला यहाँ होगा
सभी अब रंग जीवन का निराला फिर यहाँ होगा.
बहुत ही बह रहा आंसू मगर संबल नहीं खोना,
चमक चेहरे पे छाएगी ।
इसके पश्चात हास्य कवि अनिल बांके ने यह कविता सुनाकर लोगों को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया।
“जो बात भारत में है,वह चीन में कहां”
जो बात चाय में है,
वह नमकीन में कहां?
जो बात भारत में है,
वह चीन में कहाँ ?
ये बात और है चीनीमाल की,
खपत बहुत है यहाँ ।
जो बात-चीनी आईटम में हैं, वह नाजनीन में कहाँ ।
इसी क्रम में हास्य कवि रविन्द्र पांडेय प्रतापगढ़ी ने यह हास्य कविता सुनाई।
कोई ऐसी इबादत नहीं चाहिए
मन बदलने की आदत नहीं चाहिए
जिसकी एक्सपायरी कुछ दिनों की ही हो
हमको ऐसी मोहबत नहीं चाहिए।
वाणी वंदना कर चुकी रेनू द्विवेदी ने यह कविता सुनाकर लोगो की वाही वाही लूटी – मेरे मन के उपवन में ,थोड़ी कर लो सैर!
मालिक हो तुम मेरे दिल के, छोड़ो कहना गैर!
सर से लेकर पाँव तलक मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ!
झंडू बाम लगा कर सर में, मालिश कर दो पैर!
तत्पश्चात संचालन कर रहे हास्य कवि गोबर गणेश ने आज फाइल कैसे चलती है उस पर कविता सुनाई।
आजकल फाइल तब चल रही है
जब लक्ष्मी का मार्क का पहिया लग रहा है।
हास्य कवि राम नरेश पाल ने राजनीत पर कविता सुनाकर लोगो को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया
राजनीति पर चर्चा करना मेरे बस की बात नहीं
पल पल घटते घटनाक्रम में कौन गलत और कौन सही,
हम तो जमूरों की बस्ती में अब तक रहते आए हैं,
किसने कितना नाच नचाया इसका भी तो हिसाब नहीं ।
इसके उपरांत हास्य कवि राकेश बाजपेई ने यह कविता सुनाकर लोगो की वाही वाही लूटी।
एक लड़की चिल्लायी, बचाओ मेरे भाई,
कहाँ जाऊँ, आगे कुआँ पीछे खाई l
अब तो मुश्किल मेरा बच पाना है,
पीछे मंत्री निवास, आगे थाना है l
विशिष्ट अतिथि श्री सुभाष गुरुदेव ने यह कविता सुनाई।
जंग बहादुर लाले
लोग पालते कुत्ता बिल्ली,
मैं नागिन को पाले हूँ।
वह गले पड़ी हड्डी मैं,
जंग बहादुर लाले हूँ।।
इसी क्रम में मुख्य अतिथि हास्य कवि श्री श्याम जी मिश्र ने यह कविता सुनाकर लोगों को खूब हंसाया –
गंगा के किनारे
उजाले से दूर,
सिमटे हुए अंधेरे में
ये युगल,
क्या शहर से उबे हुए हैं,
जी नहीं….
आचार्य रजनीश के गंध में डूबे हुए हैं ।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे डाॅ दिनेश चन्द्र अवस्थी ने अपने दोहे सुनाकर खूब हंसाया ।
पत्नी देती है अधिक, पर लेती है अल्प,
पत्नी को खुश रखोगे, ले लो ये संकल्प।
स्त्री को प्रभु ने रचा, खूब लगाकर ध्यान,
पुरुष बनाने में लगा, बचा हुआ सामान।
लड़की सीधी हो अगर, तो कहलाती गाय।
लड़का सीधा दिखे यदि, वह गदहा कहलाय।
आशुतोष तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापित कर समापन किया ।




