गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट द्वारा भारत रत्न डा. भीमराव अम्बेडकर की 130वीं जयन्ती पर संगोष्ठी हुयी आयोजित

स्टेट हेड शमीम की रिपोर्ट
बाराबंकी। बाबा साहेब डा. अम्बेडकर एक प्रखर वक्ता और समतावादी विचारक थे।
वह सामाजिक सुधार के परोकार थे। वह भारतीय समाज की अनेक बुराईयों के लिए जाति व्यवस्था को जिम्मेदार मानते थे। जिनके आधार पर जाति व्यवस्था को औचित्यपूर्ण ठहराया जाता था। डा. अम्बेडकर बौद्ध धर्म को भारतीय संस्कृति से निकला हुआ धर्म मानते है।
उक्त विचार गांधी भवन में गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट द्वारा भारत रत्न डा. भीमराव अम्बेडकर की 130वीं जयन्ती पर आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने व्यक्त किए। इस मौके पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री डा. भीमराव अम्बेडकर के चित्र पर माल्र्यापण करके उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए श्री शर्मा ने कहा कि इस दौर में दलित आंदोलन को नई ऊंचाईयों तक पहुंचाने के लिए हमें बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के सपनों के भारत का निर्माण करने का संकल्प लेना होगा। जिससे देश व समाज में जाँत-पांत, ऊंच-नीच, गरीबी-अमीरी का फर्क पूर्णतः समाप्त हो सके।
इस मौके पर समाजसेवी अशोक शुक्ला, विनय कुमार सिंह, मृत्युंजय शर्मा, पाटेश्वरी प्रसाद, शिवा शर्मा, सत्यवान वर्मा, रंजय शर्मा, हुमायूं नईम खान, सत्यवान वर्मा, नीरज दूबे, मो तौफीक अहमद, पीके सिंह, मनीष सिंह, अनिल यादव, भागीरथ गौतम सहित कई लोग मौजूद रहे।




