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पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालयभारत

माननीय केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने भारत के पहले शीतकालीन वैज्ञानिक आर्कटिक अभियान का शुभारंभ किया

रिपोर्ट:-शमीम 

माननीय केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री, श्री किरेन रिजिजू ने आज 18 दिसंबर, 2023 को नई दिल्ली में पृथ्वी विज्ञानं मंत्रालय (एमओईएस) मुख्यालय से आर्कटिक के लिए भारत के पहले शीतकालीन वैज्ञानिक अभियान को हरी झंडी दिखाई। आर्कटिक के लिए भारतीय वैज्ञानिक अभियान (नवंबर से मार्च) शोधकर्ताओं को ध्रुवीय रातों के दौरान ऐसे क्षेत्र में अद्वितीय वैज्ञानिक अवलोकन करने की अनुमति देगा, जहां सर्दियों के दौरान लगभग रोज ही 24 घंटों तक कोई सूरज की रोशनी नहीं होती है और तापमान शून्य से नीचे (-15 डिग्री सेल्सियस से कम) होता है। इससे आर्कटिक, विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन, अंतरिक्ष के मौसम, समुद्री-बर्फ और महासागर परिसंचरण गतिशीलता (सी सर्कुलेशन डायनेमिक्स),  इकोसिस्‍टम अनुकूलन आदि ऐसे कारकों की समझ बढ़ाने में मदद मिलेगी, जो मानसून सहित उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मौसम और जलवायु को प्रभावित करते हैं।

भारत आर्कटिक में 2008 से हिमाद्रि नामक एक अनुसंधान आधार केंद्र संचालित कर रहा है, जो ज्यादातर गर्मियों (अप्रैल से अक्टूबर) के दौरान वैज्ञानिकों की मेजबानी करता रहा है। आर्कटिक में शीतकालीन अभियानों को सुविधाजनक बनाने का निर्णय जून 2023 में नॉर्वेजियन आर्कटिक के हिमाद्री, नाय-एलेसुंड, स्वालबार्ड में श्री रिजिजू द्वारा भारत की आर्कटिक गतिविधियों की व्यक्तिगत समीक्षा के बाद लिया गया है। भारत के वैज्ञानिक कौशल के विस्तार के लिए सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा के दौरान माननीय केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि  “2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की  परिकल्पना को प्राप्त करने की दिशा में, हम वैज्ञानिक गतिविधियों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सहभागिता का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आर्कटिक वैज्ञानिक, जलवायु और सामरिक महत्व का क्षेत्र है; इसलिए, हमारे वैज्ञानिकों को इस ग्रह पर जीवन और अस्तित्व को प्रभावित करने वाले क्षेत्रों को संबोधित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।” उन्होंने भारत के आर्कटिक अभियान के सदस्यों को प्रोत्साहित किया और उनसे बातचीत की, जो 19 दिसंबर, 2023 को नई दिल्ली से हिमाद्रि के लिए प्रस्थान करने वाले हैं और उनके सुरक्षित और सार्थक  प्रवास की कामना की। पहले आर्कटिक शीतकालीन अभियान के पहले बैच में मेजबान राष्ट्रीय अंटार्कटिक एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र (नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशियन रिसर्च- एनसीपीओआर), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी; भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ ट्रॉपिकल मैट्रोलोजी -आईआईटीएम), पुणे; और रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट, बेंगलुरु के शोधकर्ता शामिल हैं।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के सचिव डॉ. एम रविचंद्रन ने कहा कि “शीतकालीन अभियानों का शुभारंभ भारत के आर्कटिक प्रयासों के लिए एक ऐसा महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो पृथ्वी के ध्रुवों में हमारी वैज्ञानिक क्षमताओं का विस्तार करने के लिए हमारे लिए और अधिक रास्ते खोलता है।” मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और वित्त सलाहकार श्री विश्वजीत सहाय, संयुक्त सचिव श्री डी. सेंथिल पांडियन, पेसर (ध्रुवीय और क्रायोस्फीयर) प्रमुख,  एवं  वैज्ञानिक जी/सलाहकार, एमओईएस डॉ. विजय कुमार; राष्ट्रीय अंटार्कटिक एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) के निदेशक डॉ. थंबन मेलोथ, निदेशक, और वैज्ञानिक एफ एवं आर्कटिक ऑपरेशंस, एनसीपीओआर के समूह निदेशक डॉ. मनीष तिवारी, इस कार्यक्रम में प्रमुख गणमान्य व्यक्ति थे।

आर्कटिक में शीतकालीन अभियान शुरू करने से भारत आर्कटिक में समय पर संचालन बढ़ाने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है। प्राथमिकता वाले अनुसंधान क्षेत्रों में वायुमंडलीय, जैविक, समुद्री और अंतरिक्ष विज्ञान, पर्यावरण रसायन विज्ञान, और क्रायोस्फीयर, स्थलीय इकोसिस्‍टम और खगोल भौतिकी पर अध्ययन शामिल हैं। आर्कटिक अभियानों को सुविधाजनक बनाने के लिए, एनसीपीओआर आर्कटिक क्षेत्र में अत्याधुनिक अनुसंधान करने के लिए खुले आह्वान (ओपन कॉल) के माध्यम से देश भर से आमंत्रित अनुसंधान प्रस्तावों की समीक्षा करता है। राष्ट्रीय अंटार्कटिक एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) निदेशक डॉ. मेलोथ ने बताया “इस वर्ष,पृथ्वी  विज्ञानं मंत्रालय (एमओईएस) को शीतकालीन आर्कटिक अनुसंधान के लिए 41 प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से 15 को गहन सहकर्मी समीक्षा और विशेषज्ञ चयन समिति प्रक्रिया के बाद शॉर्टलिस्ट किया गया है ।

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चित्र : माननीय केंद्रीय मंत्री, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, श्री किरेन रिजिजू, नई दिल्ली में एमओईएस  मुख्यालय से आर्कटिक के लिए भारत के पहले शीतकालीन वैज्ञानिक अभियान का शुभारंभ करते हुए (बाएं) और शीतकालीन अभियान के पहले बैच और वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिभागियों के समूह के चित्र लेने के समारोह  में पृथ्वी विज्ञानं मंत्रालय मुख्यालय और राष्ट्रीय अंटार्कटिक एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) के अधिकारी (दाएं)।

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चित्र: पहले भारतीय आर्कटिक शीतकालीन अभियान के शुभारंभ पर पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन (बाएं) और भारत का आर्कटिक अनुसंधान आधार हिमाद्रि, उत्तरी ध्रुव से 1231 किमी दक्षिण में 78˚55′ उत्तर(एन), 11˚56′  पूर्व (ई) पर स्थित है। जहां भारतीय आर्कटिक अभियान के सदस्य अवलोकन और प्रयोग करेंगे।

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पृथ्वी के ध्रुवों (आर्कटिक और अंटार्कटिक) पर भारतीय वैज्ञानिक अभियानों को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) एमओईएस की पीएसीईआर (ध्रुवीय और क्रायोस्फीयर) योजना के अंतर्गत सुविधा प्रदान की जाती है, जो पूरी तरह से पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के संस्थान राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागर अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर), गोवा, एक स्वायत्त संस्थान के तत्वावधान में है।

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इस बैठक  (मीटिंग) की  रिकॉर्डिंग एमओईएस  यूट्यूब चैनल (https://www.youtube.com/moesgoi) पर https://www.youtube.com/live/bRcwlABnISc?si=eQqrTYGaxyiB_vWF पर उपलब्ध है।

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