
रिपोर्टर :- उज्जवल कुमार साहा
साहिबगंज। जिले के राजमहल क्षेत्र में पटना विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के छात्रों के लिए एक दिवसीय शैक्षणिक भूवैज्ञानिक फील्ड ट्रिप का आयोजन किया गया। इस भ्रमण का नेतृत्व मॉडल कॉलेज राजमहल के प्राचार्य सह प्रसिद्ध भूवैज्ञानिक डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने किया।
फील्ड ट्रिप का मुख्य उद्देश्य छात्रों को राजमहल ट्रैप से जुड़ी चट्टानी संरचनाओं, जीवाश्मों और ज्वालामुखीय प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अनुभव कराना था, ताकि वे अपने सैद्धांतिक ज्ञान को व्यवहारिक रूप में समझ सकें।
भ्रमण की शुरुआत बोरियोर क्षेत्र से हुई, जहां छात्रों ने ज्वालामुखीय क्रम से संबंधित इंटरट्रैपियन तलछटी परतों का अध्ययन किया। डॉ. सिंह ने बताया कि ये परतें लावा प्रवाह के बीच बने शांत काल में निर्मित हुई हैं, जिनमें सिल्टस्टोन और मडस्टोन जैसी चट्टानें पाई जाती हैं। साथ ही उन्होंने पौधों के जीवाश्मों, जैसे पत्थर बनी लकड़ी और पत्तियों के अवशेषों के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
इसके बाद टीम मांड्रो फॉसिल पार्क पहुंची, जहां छात्रों ने सिलिकीकृत लकड़ी और अन्य जीवाश्मों का अवलोकन किया। यहां डॉ. सिंह ने बेसाल्ट में पाए जाने वाले गोलाकार अपक्षय की प्रक्रिया को समझाया, जो रासायनिक क्रियाओं और संरचनात्मक विशेषताओं के कारण बनती है।

फील्ड ट्रिप के दौरान छात्रों ने कटघर, महाराजपुर, वृंदावन पहाड़, मॉडल कॉलेज परिसर, चाइना क्ले खनन क्षेत्र सहित कई अन्य स्थलों का भी भ्रमण किया। इन स्थानों पर चट्टानों की विविधता, खनिज संसाधनों और क्षेत्रीय भूगर्भीय संरचनाओं का अध्ययन कराया गया।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मोती झरना रहा, जहां छात्रों ने बेसाल्टिक लावा प्रवाह की संरचनाओं का प्रत्यक्ष अध्ययन किया। यहां स्तंभाकार जोड़ विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। डॉ. सिंह ने बताया कि ये संरचनाएं लावा के ठंडा होने के दौरान तापीय संकुचन से बनती हैं।
इस मौके पर डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने कहा कि राजमहल की पहाड़ियों में अभी भी कई भूवैज्ञानिक रहस्य छिपे हुए हैं और भविष्य में यहां महत्वपूर्ण जीवाश्म, यहां तक कि डायनासोर से जुड़े प्रमाण मिलने की भी संभावना है।
पूरे भ्रमण के दौरान छात्रों में काफी उत्साह देखने को मिला। यह फील्ड ट्रिप उनके लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक साबित हुआ, जिसने भूविज्ञान के विभिन्न पहलुओं को समझने का बेहतर अवसर प्रदान किया।


