महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती वर्ष के अंतर्गत प्रकाशोत्सव आयोजित

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रिपोर्ट मण्डल ब्यूरो शमीम

बाराबंकी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता के उपरान्त देश में रामराज्य स्थापित करने का सपना देखा था। गांधीजी के इस विचार को गंभीरता से नहीं लिया गया। रामराज्य की अवधारणा किसी धार्मिक संकीर्णता का द्योतक नहीं है बल्कि यह जनहितकारी अवधारणा है। इस पर गंभीर मनन एवं चिंतन की आवश्यकता है।
यह विचार गांधी भवन में महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती वर्ष के अन्र्तगत आयोजित हुए प्रकाशोत्सव के अवसर पर भूतपूर्व भारतीय रेल प्रशासनिक अधिकारी नरेश नारायण अवस्थी ने व्यक्त किए। इस मौके पर श्री अवस्थी ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्र्यापण करते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नमन किया। तदोपरान्त गांधी भवन में गांधी 150वीं जयन्ती के संदर्भ में 150 दीप जलाए गए।
इस अवसर पर समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी की 150वी जयन्ती पर 02 अक्टूबर से 30 जनवरी तक विविध समसामायिक कार्यक्रम आयोजित होते रहेंगे। गांधी सप्ताह के समापन बाद यह दूसरा आयोजन है। जिसके माध्यम से महात्मा गांधी के रामराज्य की व्याख्या पर देश व समाज का मार्गदर्शन किया गया।
बालाजी गुु्रप आॅफ इंस्टीट्यूशन के प्रबंधक अंकुर माथुर ने कहा कि सदियों से आदर्श राज्य व्यवस्था के लिए रामराज्य का उदाहरण दिया जाता रहा है। महात्मा गांधी ने भी जिस राम राज्य की कल्पना की थी उसमें आदर्श लोकतंत्र के सभी गुण मौजूद हैं। हालांकि लोकतंत्र की आधुनिक परिभाषा के अनुसार राम राज्य को लोकतंत्र नहीं कहा जा सकता है। वह मर्यादित राजतंत्र था। लेकिन वह एक ऐसा राजतंत्र था जिसमें श्रेष्ठ लोकतंत्र और कुलीन तंत्र की सभी विशेषताओं को सम्मिलित कर लिया गया था।
समाजसेवी अशोक शुक्ला ने कहा कि सत्य के मार्ग पर जो भी चलता है, उसके सामने बाधाएं आती ही हैं। उन्होंने कहा कि सत्य जब एकदम नजदीक होता है तो व्यक्ति के बेहद करीबी लोग ही बाधा पहुंचाने लगते हैं। कांग्रेस पार्टी के जिला महासचिव दानिश आजम वारसी ने कहा कि गांधी के समदर्शन आज की देश को बहुत जरूरत है। भाजपा सरकार ने गांधी जी के चश्मा को समदर्शन का प्रतीक बनाया है। लेकिन गांधी की विचारधारा को नहीं अपना पा रहे है।
इस मौके पर जिला बार एसोशिएसन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित, वरिष्ठ अधिवक्ता हुमायूं नईम खान, विनय कुमार सिंह, प्रसपा नेता धनंजय शर्मा, समीर सिंह, पाटेश्वरी प्रसाद, रवि प्रताप सिंह, सत्यवान वर्मा, उदय प्रताप सिंह, अशोक जायसवाल, राजेश निगम, पत्रकार संतोष शुक्ला, अंकित शर्मा, मनीष सिंह, दिनेश चन्द्र श्रीवास्तव, पी.के सिंह, ज्ञान शंकर तिवारी सहित कई लोग मौजूद रहे।

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