बाराबंकी

भावलिंगी संत की हुयी वर्षायोग स्थापना स्वानुभूति चातुर्मास की मंगल स्थापना हुई सम्पन्न

स्टेट हेड शमीम की रिपोर्ट

बाराबंकी में भावलिंगी संत की हुयी वर्षायोग स्थापना
स्वानुभूति चातुर्मास की मंगल स्थापना सम्पन्न
बाराबंकी नि. प्रेस,
वर्तमान के भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज ससंघ 25 साधुओं सहित दिगम्बर जैन बड़ा मन्दिर बाराबंकी में विराजमान है आज गुरूपूर्णिमा के पावन पर्व के दौरान सरकार द्वारा जारी किय गये आदेशों का पालन करते हुये प्रातः कालीन बेला में समस्त साधुओं ने गुरूदेव के चरणो का प्रच्छालन किया तथा शास्त्र भेंट किया। इसके उपरान्त बाहर से पधारे श्रद्धालुओं तथा स्थानीय श्रावकों ने अध्र्य समर्पण के साथ मंगल आरती कर गुरूदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया। सभी श्रावकों ने संपूर्ण कार्यक्रम का आनंद प्राप्त किया। मध्यान्ह काल में ध्वजारोहण का कार्यक्रमण श्रीमान आदिश्वर कुमार जी जैन लखनऊ द्वारा सम्पन्न किया गया। परम् पूज्य आचार्य श्री ससंघ वंशीघर सभागार में बने मंच पर विराजमान हुये सभी ने दो गज की दूरी का फासला रखते हुये स्थान ग्रहण किया। सूरिगच्छाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण दीप प्रज्वलन देवेंन्द्र नगर, सिवनी, छिंदवाड़ा, रावतभाटा से पधारे गुरूभक्तों को प्राप्त हुआ। अनेकों सांस्कृतिक कार्यक्रम को भी सम्पन्न किया गया। मंगलाचरण करने का सौभाग्य महिलामण्डल बाराबंकी को प्राप्त हुआ जिसे सभी के द्वारा सराहा गया।
इनके उपरान्त समस्त जैन समाज कमेटी एवं वर्षायोग कमेटी ने श्रीफल अर्पण करके वषायोग स्थापना की प्रार्थना की। समाज अध्यक्ष कमलेश जैन, मंत्री अंकुर जैन तथा समस्त समिति तथा समाज की भावनाओं कस सम्मान रखते हुये सभी साधुओं ने प्रसन्न मुद्रा में स्वीकृति प्रदान की।
पाद प्रच्छालन का सौभाग्य कासलीवाल परिवार लखनऊ से आदिश्वर जी सरिता जी को प्राप्त हुआ। श्रीमान विजय जी हैप्पी जैन टीकमगढ़ ने शास्त्रांे का सौभाग्य प्राप्त किया।
इसके पश्चात् सभी गुरूभक्तों ने पूर्ण भक्तिभाव से गुरूदेव की पूजन की। संगतीकार रामेशचन्द्र जी की आवाज से बहुत ही शानदार माहौल नजर आ रहा था। भोपाल से पधारे बाल ब्रम्हचारी आशीष भैया पुण्यांश तथा देवेन्द्र नगर पन्ना से पधारे प्रतिष्ठाचार्य पं0 संकेत जैन (विवेक) के मंगल निर्देशन में कलश स्थापन कर्ता पुण्यात्मा श्रावकों को बोलियो के माध्यम से चयन किया गया। प्रमुख पांच कलशों तथा 108 सामान्य कलशों की स्थापना की गई। समस्त आर्थिक संघ को वस्त्र भेट कर श्रावको ने पुण का अर्जन किया। वैश्विक महामारी कोरोना के प्रकोप के कारण अनेकों गुरूभक्तों ने घर बैठे ही गुरूवंदन कर मोबाईल के माध्यम से कार्यक्रम की अनुमोदना की। समय-समय पर उपस्थित भक्तों के हाथों को सैनेटाईज किया जा रहा था। इस अवसर पर भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने सभी को अपने मंगल प्रवचनो से लाभांन्वित करते हुये कहा कि जब हम अयोध्या में थे तब आप लोग अपनी आस्थायें लेकर वर्षायोग हेतु निवेदन किरने आते रहे आज गुरूपूर्णिमा में उसका फल मिल रहा है। आज के दिन इन्द्रभूती गौतम को भगवान महावीर स्वामी का आर्शीवाद प्राप्त हुआ और हम भी आज आपको चातुर्मास का आशीर्वाद दे रहे है। संत तो स्वतंत्र ही रहते है बंधन में रहने वाले बंधन चाहते है और सफल भी हो जाते है।
कार्यक्रम के अंतिम चरण पूज्य आचार्य श्री ने चातुर्मासिक स्थापना की भक्ति पूर्वक मंगल स्थापना विधि सम्पन्न की। चातुर्मास का मुख्य कलश श्री रतन लाल निर्मल कुमार वाकलीबाल परिवार ने स्थापित किया। शेष चार आराधना कलश क्रमशः श्री विपिन कुमार जैन, श्री प्रदीप जी एटा, डाॅ0 नागेन्द्र जैन एवं श्री कमलेश कुुमार जैन परिवार ने स्थापित किये। कार्यक्रम का संचालन ब्र0 आशीष पुण्यांश एवं पं0 संकेत जैन द्वारा किया गया।

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