अब तकअभी तकबाराबंकी

चलो बुलावा आया है ,माता ने बुलाया है

बाराबंकी। चलो बुलावा आया है ,माता ने बुलाया है ” मां दुर्गा अत्यंत वात्सल्यमयी है माता जी के आह्वान पर उनके भक्त नंगे पांव इनकी छटा को निहारने के लिए दौड़ पड़ते हैं जब जब इस पृथ्वी पर बढ़ते हैं धर्म का नाश होता है अधर्म का बोलबाला होता है तो ईश्वरीय शक्तियां धर्म की स्थापना के लिए नाना रूपों में अवतरित होती हैं ।नवरात्र पर माँ की साज-सज्जा मन को मोहने वाली है मां दुर्गा की सवारी शेर है इसलिए इन्हें शेरावाली भी कहा जाता है उनके हाथों में खड्ग त्रिशूल धनुष बाण खप्पर चक्र जैसे नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हो रहे जब जब इस पृथ्वी पर पाप बढ़ते धर्म का नाश होता है आसुरी शक्तियां प्रबल होती है तो आसुरी शक्तियों का दमन करने व धर्म की स्थापना के लिए मां दुर्गा कभी काली के रूप में कभी चंडी के रूप में नाना रूपों में पृथ्वी पर अवतरित होकर धर्म की रक्षा करती है ।पौराणिक मतानुसार मां दुर्गा की द्वितीय शक्ति का नाम ब्रह्मचारिणी है नवरात्र के दूसरे दिन इन्हीं की पूजा किए जाने का विधान पुराणों में मिलता है ब्रह्मा जी की शक्ति से उत्पन्न होने के कारण मां का यह स्वरूप ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध हुआ उनका उद्भव ब्रह्मा जी के कमंडल से माना जाता है ब्रह्मा जी सृष्टि के सृजक हैं ब्रह्मचारिणी उनकी शक्ति है जब मानस पुत्रों से सृष्टि का विस्तार नहीं हो सका तो ब्रह्मा जी की शक्ति से सृष्टि का विस्तार हुआ इसी कारण इन्हें सृष्टि का कारक माना गया है ।ब्रह्मचारिणी देवी ज्ञान वैराग्य ध्यान की अधिष्ठात्री हैं उनके एक हाथ में कमंडल दूसरे हाथ में रुद्राक्ष की माला है करमाला स्फटिक का ध्यान योग नवरात्र की दूसरी अधिष्ठापन शक्ति है ब्रह्मचारिणी देवी ब्रह्म शक्ति यानी तप का प्रतीक मानी जाती है इनकी उपासना करने से तप की शक्ति उत्पन्न होती है और साधक को सभी अभीष्ट फलों की प्राप्ति होती है ।नवरात्र के दूसरे दिन क्षेत्र के मरकामऊ कटका किंतूर बरदरी सैदनपुर शहरी अमरा देवी मंदिर अमरा कटेरा मंदिर जंगलेश्वर मंदिर ज्वालामुखी देवी मंदिर गुरसेल देवी मंदिर कालिका देवी मंदिर समेत विभिन्न गांवों में श्रद्धालुओं ने व्रत धारण का मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी की फल फूल धूप दीप तथा वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा अर्चना किया वहीं सौभाग्यवती स्त्रियों ने मां की प्रतिमा को अपने सुहाग सूचक बिंदी चूड़ी सिंदूर कंठहार व धानी चुनरिया भेंट करके अपने मंगल भविष्य की कामना किया। ।

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